‘अधिक मास’ में आज से शुरू हुई ‘पद्मिनी एकादशी’, जानिए इस विशेष एकादशी व्रत की महिमा
- Written By: नवभारत डेस्क
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सीमा कुमारी
नई दिल्ली: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत के दिन भगवान विष्णु की विधिवत उपासना करने से जीवन में सुख समृद्धि आती है। अधिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ‘पद्मिनी एकादशी’ का व्रत रखा जाता है। ‘पद्मिनी एकादशी’ (Padmini Ekadashi 2023) को कमला एकादशी भी कहते है। इस साल यह एकादशी का व्रत 29 जुलाई शनिवार को रखा जाएगा।
यह एकादशी व्रत 3 वर्षों में एक बार रखा जाता है और माना जाता है कि यह एकादशी व्रत रखने से साधकों को पुण्य की प्राप्ति होती है। आइए जानें कब रखा जाएगा ‘पद्मिनी एकादशी व्रत’।
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तिथि
पंचांग के अनुसार, श्रावण अधिक मास के एकादशी तिथि की शुरुआत 28 जुलाई को दोपहर 2 बजकर 51 मिनट से होगी। साथ ही इस तिथि का समापन 29 जुलाई को दोपहर 1 बजकर 5 मिनट पर हो जाएगा। ऐसे में पद्मिनी एकादशी व्रत 29 जुलाई 2023, शनिवार के दिन रखा जाएगा। पंचांग में बताया गया है कि इस विशेष दिन पर ब्रह्म और इंद्र योग का निर्माण हो रहा है। साथ ही पद्मिनी एकादशी व्रत पारण 30 जुलाई को सुबह 5 बजकर 41 मिनट से सुबह 8 बजकर 24 मिनट बीच किया जाएगा।
पूजा विधि
एकादशी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान कर, पीले रंग का वस्त्र धारण करें। इससे पहले पूजा स्थल की अच्छे साफ-सफाई करें। ऐसा करने के बाद विधि-विधान से भगवान विष्णु की उपासना करें और पूजा के समय केसर मिश्रित जल से भगवान विष्णु का अभिषेक करें। इसके बाद भगवान विष्णु के स्तोत्र का पाठ करें और व्रत कथा का श्रवण करें। इस विशेष दिन पर विष्णु सहस्रनाम का पाठ जरूर करें। पूजा के अंत में आरती जरूर करें।
धार्मिक महत्व
सभी एकादशी व्रतों के समान ही ‘पद्मिनी एकादशी’ पर भी भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, लेकिन यह एकादशी हर 3 साल पर तब आती है, जब अधिक मास लगता है। ‘पद्मिनी एकादशी व्रत’ करने से संतान, यश और वैकुंठ की प्राप्ति होती है।
