आज मनाया जा रहा हैं राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस, जानिए कब से हुई इसकी शुरूआत
- Written By: दीपिका पाल
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस 2024 ( डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल टीम: आज 10 फरवरी को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (National Deworming Day 2024) के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य 1 से 19 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए कृमि मुक्ति के महत्व और जागरूकता बढ़ाने से है। इस दिवस को लेकर स्कूलों में बच्चों को साफ-सफाई के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाता है।
कब से शुरू हुई दिवस मनाने की पहल
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाने का लक्ष्य सभी बच्चों और किशोरों में मृदा-संचारित हेल्मिंथ (एसटीएच), जिसे आमतौर पर परजीवी आंतों के कीड़ों के प्रसार को कम करने से है। इस दिवस को मनाने की पहली शुरूआत साल 2015 से की गई थी। इसे एक दिन में लागू करने वाले सबसे बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों में से एक है, जो हर साल दो एनडीडी राउंड के माध्यम से करोड़ों बच्चों और किशोरों तक पहुंचता है।
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस 2024 की थीम
इस राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस 2024 की थीम चयन नहीं की गई है जिसमें कई प्रकार की थीम सामने आ चुकी है। इसमें से साल 2024 की थीम का चयन होता है।
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“एसटीएच हटाएं: बच्चों के स्वस्थ भविष्य में निवेश करें।”
“एक साथ मिलकर, हम अपने भविष्य को ख़राब कर सकते हैं।”
“एसटीएच-मुक्त बच्चे: भारत के लिए एक स्वस्थ और उत्पादक कार्यबल।”
“शिक्षा अच्छे स्वास्थ्य से शुरू होती है: उज्जवल भविष्य के लिए कृमि मुक्ति।”
“एसटीएच संक्रमण के चक्र को तोड़ने के लिए समुदायों को सशक्त बनाना।”
बच्चों में कृमि संक्रमण कैसे होता है?
बच्चों में कृमि संक्रमण विभिन्न कारकों के कारण होता है जिनमें स्कूलों या सार्वजनिक जगहों पर व्यक्तिगत स्वच्छता की कमी, कच्चा और दूषित भोजन, अधिक मिठाई और जंक फूड का सेवन करते रहना। जब बच्चों में यह कृमि संक्रमण फैलता है तो इसके कई सारे लक्षण सामने आते है, जो इस प्रकार हैं…
– थकान
– बिना कारण वजन घटना
– पेट में दर्द या कोमलता
– दस्त, मतली या उल्टी
– गैस/सूजन
क्या होता है STH
यहां पर इस बीमारी में कृमि ( कीड़े) यानि मृदा-संचारित हेल्मिंथ (एसटीएच) की बात की जाए तो, वे कृमि या कृमि जो मल से दूषित मिट्टी के माध्यम से फैलते हैं, उन्हें मृदा-संचारित कृमि या आंतों के परजीवी कृमि के रूप में जाना जाता है। इसमें कई प्रकार के कीड़े पनपते हैं जिनमें राउंडवॉर्म, व्हिपवर्म और हुकवर्म शामिल हैं।
कैसे फैलता है एसटीएच
यहां पर एसटीएच, कई तरीकों से फैलता है जो इस प्रकार है-
– ये अंडे संक्रमित व्यक्ति के मल में चले जाते हैं
– वयस्कों में कीड़े भोजन और जीवित रहने के लिए आंतों में रहते हैं।
– संक्रमित व्यक्ति जो बाहर शौच करता है, वह कीड़ों के अंडे मिट्टी में फैला देता है।
– ये कीड़े उन सब्जियों के माध्यम से प्रवेश करते हैं जिन्हें धोया नहीं जाता, पकाया नहीं जाता या सावधानी से छीला नहीं जाता।
– ये कीड़े मिट्टी के माध्यम से बच्चों में प्रवेश करते हैं। बच्चे मिट्टी में खेलते हैं और फिर बिना धोए अपने हाथ मुंह में डाल लेते हैं।
कैसे करें STH से बचाव
यहां पर एसटीएच से बचाव रखने के लिए कई बातों का ख्याल रखना जरूरी होता है जो इस प्रकार हैं..
-स्वच्छ शौचालयों का प्रयोग करें।
-बाहर शौच का प्रयोग न करें।
– खाने से पहले और शौचालय का उपयोग करने के बाद मुख्य रूप से हाथ ठीक से धोएं।
– फलों और सब्जियों को सुरक्षित और साफ पानी में ठीक से धोएं।
