जानें 'खरमास' के पूरे 30 दिन आखिर क्यों नहीं करते हैं कोई भी शुभ काम?

Kharmas 2021
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सीमा कुमारी

नई दिल्ली: इस साल ‘खरमास' 14 दिसंबर से लग रहा है। जो पूरे एक महीने के बाद यानी,14 जनवरी, 2022 को समाप्त होगा। ज्योतिषियों के अनुसार, हर साल मार्गशीर्ष और पौष महीने के बीच में 'खरमास' लगता है। जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं तो खरमास लगता है।

ज्योतिषविदों के अनुसार, इस दौरान किसी तरह का शुभ कार्य नहीं किया जाता है, जैसे-शादी-विवाह, सगाई, मुंडन और भवन निर्माण जैसे मंगल कार्य वर्जित माने जाते है। आइए जानें आखिर खरमास में क्यों बंद होते हैं शुभ कार्य ?

ज्योतिष-शास्त्र के अनुसार, बृहस्पति धनु राशि का स्वामी होता है। बृहस्पति का अपनी ही राशि में प्रवेश इंसान के लिए शुभ नहीं माना जाता है। ऐसा होने पर लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर पड़ जाता है।  इस राशि में सूर्य के मलीन होने की वजह से इसे 'मलमास' भी कहा जाता है। ऐसा कहते हैं कि, 'खरमास' में सूर्य का स्वभाव उग्र हो जाता है। सूर्य के कमजोर स्थिति में होने की वजह से इस महीने शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है।

'खरमास' की पौराणिक कथा

लोक कथाओं के अनुसार 'खरमास' (मलमास) को अशुभ माह मानने के पीछे एक पौराणिक कथा बताई जाती है। 'खर' गधे को कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 'मार्कण्डेय पुराण' के अनुसार एक बार सूर्य अपने सात घोड़े वाले रथ को लेकर ब्रह्मांड की परिक्रमा करने के लिए निकल पड़ते हैं।

इस परिक्रमा के दौरान सूर्य देव को रास्ते में कहीं भी रुकने की मनाही होती है। लेकिन, सूर्य देव के सातों घोड़े कई साल निरंतर दौड़ने की वजह से जब प्यास से व्याकुल हो जाते हैं, तो सूर्य देव उन्हें पानी पिलाने के लिए निकट बने एक तलाब के पास रुक जाते हैं। तभी उन्हें याद आता है कि, उन्हें तो रास्ते में कहीं रुकना ही नहीं है। जिसके बाद वे कुंड के पास कुछ गधों को अपने रथ के साथ जोड़कर आगे बढ़ जाते है। जिससे उनकी गति धीमी हो जाती है। यही कारण है कि, 'खरमास' को अशुभ महीने के रूप में जाना जाता है।  

अगर प्रेम विवाह या स्वयंवर का मामला हो, तो विवाह किया जा सकता है। जो कार्य नियमित रूप से हो रहे हों, उनको करने में भी 'खरमास' का कोई बंधन या दबाव नहीं है। गया में श्राद्ध भी इस अवधि में किया जा सकता है। उसकी भी वर्जना नहीं है।

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