जानिए क्यों मनाया जाता है ‘गंगा दशहरा’, इस दिन दान-पुण्य करने का महत्व जानें
- Written By: नवभारत डेस्क
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-सीमा कुमारी
हिंदू धर्म में गंगा दशहरा का विशेष महत्व है। गंगा दशहरा का पावन पर्व हर साल ज्येष्ठ महीने की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल गंगा दशहरा 9 जून को मनाया जाएगा। मान्यताओं के मुताबिक, राजा भागीरथ के कठोर तपस्या के बाद मां गंगा का अवतरण पृथ्वी पर हुआ था। उससे पहले गंगा नदी स्वर्ग का हिस्सा थीं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गंगा स्नान करने और दान-पुण्य करने से व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिलती है। आइए जानें ‘गंगा दशहरा’ (Ganga Dussehra) का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसकी महिमा
शुभ मुहूर्त
दशमी तिथि प्रारम्भ-
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जून 9, 2022 को 8.21 ए एम बजे
दशमी तिथि समाप्त-
जून 10, 2022 को 7.30 ए एम बजे
मां गंगा मंत्र-
।।ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः।।
इस दिन शर्बत, पानी, मटका, पंखा, खरबूजा, आम. चीनी आदि चीजें दान की जाती हैं। ऐसा कहा जाता है कि व्यक्ति इस दिन जिस भी चीज का दान करते हैं वो संंख्या में 10 होनी चाहिए।
पूजा-विधि
‘गंगा दशहरा’ के दिन प्रातःकाल उठकर गंगा जी में स्नान करें। लेकिन यदि कोरोना-काल के कारण यह संभव न हो तो घर पर ही स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। अब घर के मंदिर और घर में गंगाजल का छिड़काव करें। इसके बाद पूजा स्थल पर दीप प्रज्वलित करें। माँ गंगा का स्मरण करें और उनकी आरती पढ़ें। इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इस दिन जल में गंगाजल मिलाकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। इस दिन व्रत रखना भी बहुत फलदायी होता है।
महिमा
मान्यताओं के अनुसार, गंगा दशहरा का दिन बहुत ही शुभ एवं पवित्र माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन गंगा जी में स्नान करने से और दान- पुण्य करने से करीब दस हजार पापों से मुक्ति मिलती है। माना जाता है कि, जो भी व्यक्ति इस दिन गंगा स्नान करता है और दान-पुण्य करता है उसे महायज्ञ के समान शुभ फल मिलता है। कहा जाता है कि गंगा दशहरा के दिन मां गंगा की पूजा-अर्चना करने से मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।
