नई दिल्ली : विद्यारंभ यह एक तरह का महत्वपूर्ण संस्कार है। जब बालक या बालिका शिक्षा ग्रहण करने के योग हो जाते है तब यह विद्यारंभ संस्कार किया जाता है। इसलिए इसे विद्यारंभ संस्कार कहा जाता है। साथ ही इस दिन माता-पिता और शिक्षकों को उनके कर्तव्य के प्रति जागरूक किया जाता है। ताकि वो बच्चों को अक्षर ज्ञान, अनेक विषयों के ज्ञान तथा अच्छे जीवन जीने का ज्ञान का अभ्यास करा पाएं।
हिन्दू धर्म में विद्या या ज्ञान का स्थान सर्वोच्च है।हमारे जीवन में विद्या और ज्ञान की अहमियत अधिक है। यही कारण है कि जब बच्चा पांच वर्ष का हो जाता है तब यह संस्कार पूरे विधि-विधान के साथ किया जाता है। इसी विधि-विधान के कार्य को विद्यारंभ संस्कार कहते है। आइए आज इस दिवस के खास अवसर पर इससे जुडी कुछ महत्वपूर्ण बातें जानते है। जानते हैं विद्यारंभ संस्कार के बारे में।
हम सब जानते है विद्या का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। विद्या और ज्ञान का महत्व प्राचीन काल से ही रहा है। भारत में शिक्षा को लेकर कितनी जागरूकता थी इसका अंदाजा तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविख्यात विश्वविद्यालयों से लगाया जा सकता है क्योंकि ये दोनों विश्वविद्यालय भारत में ही स्थित थे। दुनियाभर के छात्र यहां शिक्षा ग्रहण करने आते थे।
हम सभी अपने बच्चों को विद्या में निपुण बनाना चाहते हैं। अत: विद्यारंभ संस्कार द्वारा बालक/बालिकाओं में ज्ञान के प्रति जिज्ञासा डालने की कोशिश की जाती है। साथ ही उनमे सामाजिक और नैतिक गुण के वास की भी प्रार्थना की जाती है। इसलिए यह दिन मनाया जाता है।