

सीमा कुमारी
नई दिल्ली: भारतीय संस्कृति में माथे पर तिलक लगाना न केवल शुभ माना जाता है। बल्कि इसे लाभकारी भी माना जाता है। सनातन धर्म में कई ऐसी परम्पराएं हैं जिनका पालन पूजा-पाठ के दौरान सदियों से होता चला आ रहा है। जो आज भी सनातन धर्म में कायम है, इनमें कुछ हैं- बड़ों के चरण छूकर आशीर्वाद लेना, शंख बजाना, धूप बत्ती जलाना इत्यादि। इन सभी में 'तिलक लगाना' भी शामिल है।
ऐसा माना जाता है कि बिना तिलक लगाए कोई भी पूजा अथवा अनुष्ठान पूर्ण नहीं होती है। साथ ही पूजा के दौरान देवी-देवताओं का भी तिलकाभिषेक किया जाता है। यह न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि वैज्ञानिक तौर पर भी इसके कई फायदे हैं। आइए जानें आचार्य श्याम चंद्र मिश्र से तिलक लगाने का महत्व, लाभ और नियम के विषय में-
आचार्य श्याम चंद्र मिश्र के अनुसार, नितदिन पूजा के दौरान तिलक लगाने से कई प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं। इस परम्परा को नियमानुसार पूरा करने से मन एवं मस्तिष्क शांत रहता है और सारा ध्यान ईश्वर की भक्ति में लीन रहता है। इसके साथ तिलक लगाने से दैवीय आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। जिसके कारण सभी कार्य सफल हो जाते हैं।
हिन्दू श्रद्धालुओं को हमेशा तिलक लगाने के लिए कुमकुम, रोली, पीला व सफेद चंदन, हल्दी या भस्म का प्रयोग कर सकते हैं। साथ ही यह मान्यता भी प्रचलित है कि किसी शुभ कार्य को शुरू करने से पहले तिलक लगाना चाहिए और भगवान का आशीर्वाद लेना चाहिए। ऐसा करने से कार्य सफल हो जाता है। साथ ही जीवन में आ रही अड़चने दूर हो जाती हैं।
जिन लोगों को अनिद्रा या तनाव परेशान करता है। उन्हें माथे के बीच में मालिश करनी चाहिए और चंदन का तिलक लगाना चाहिए। साथ ही तिलक लगाने से व्यक्ति की एकाग्रता शक्ति बढ़ती है और शरीर में सकारात्मक उर्जा का संचार होता है।
ज्योतिषियों का मानना है कि, तिलक न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इस क्रिया को महत्वपूर्ण बताया गया है। बता दें कि तिलक का प्रयोग करने से हमारे मस्तिष्क की तंत्रिकाएं शांत मुद्रा में रहती हैं और इससे सिरदर्द जैसी गम्भीर समस्या भी दूर रहती है। साथ माना यह भी जाता है कि बुखार में चंदन का तिलक लगाने से व्यक्ति को लाभ मिलता है और इससे शरीर का तापमान कम रहता है।
शास्त्र की मानें तो तिलक लगाने के भी कुछ नियम बताए गए हैं। जिनका पालन करने से व्यक्ति हर दिन करना चाहिए। आचार्य बताते हैं कि हमेशा तिलक को अनामिका यानि छोटी उंगली के बगल वाली उंगली से लगानी चाहिए। दूसरे के माथे पर तिलक लगाते समय व्यक्ति को अंगूठे का प्रयोग करना चाहिए। यही सही विधि है।