'यशोदा जयंती' की महिमा जानिए, कैसे होंगे बाल कृष्ण के साक्षात दर्शन और क्या है इसकी सही तिथि

Yashoda Jayanti
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-सीमा कुमारी

'यशोदा जयंती' (Yashoda Jayanti) 22 फरवरी, सोमवार को है। यह जयंती हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के  मुताबिक, इस दिन मां यशोदा (Maa Yashoda) का जन्म हुआ था। कहा जाता है कि, मां यशोदा ने ही भगवान श्रीकृष्ण का लालन-पालन किया था, जबकि उनका जन्म मां देवकी के कोख से हुआ था। इस दिन माता यशोदा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। और व्रत भी रखा जाता है।

मां यशोदा के नाम श्रवण से मन में ममता की प्रतिमूर्ति प्रकाशित हो जाती है। ज्योतिषों का कहना है कि, मां यशोदा स्वयं में संपूर्ण हैं। उनके नाम का अभिप्राय यश देना है। मां यशोदा स्वयं संतोषी रूप धारण कर दूसरे को सुख और सौभाग्य देती हैं। अतः भगवान श्रीकृष्ण ने मां यशोदा को अपनी माता रूप में चुना। इससे मां यशोदा का जीवन भी धन्य हो गया।

धार्मिक मान्यता है कि, मैया यशोदा की पूजा करने वाले साधक को सुख, सौभाग्य और वैभव की प्राप्ति होती है। साधक के जीवन में व्याप्त सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं। साथ ही, भगवान श्रीकृष्ण साधक का मार्ग प्रशस्त करते हैं। अतः 'यशोदा जयंती' के दिन मैया की पूजा विधि-पूर्वक करनी चाहिए। आइए जानें 'यशोदा जयंती' की पूजा विधि और महिमा-

पूजा-विधि

इस दिन ब्रह्म बेला में उठकर सर्वप्रथम मां आदिशक्ति के यशोदा स्वरूप को स्मरण कर नमस्कार करें। इसके बाद घर की साफ-सफाई कर दैनिक कार्यों से निवृत हो जाए। अब गंगाजल युक्त पानी से स्नान-ध्यान कर नवीन वस्त्र धारण करें। इसके पश्चात, आमचन कर अपने आप को पवित्र कर व्रत संकल्प लें। अब मां की पूजा फल, फूल, दूर्वा, सिंदूर, अक्षत, धूप, दीप, अगरबत्ती आदि से करें। धार्मिक ग्रंथों में लिखा है कि मां को प्रसाद में फल, हलवा, मिठाई आदि अवश्य भेंट करें। तत्पश्चात आरती और अपने परिवार के कुशल मंगल की कामना करें। दिन भर उपवास रखें और शाम में में आरती करने के बाद फलाहार करें।

महत्व

'यशोदा जयंती' का दिन माता और संतान के प्रेम को दर्शाता है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को 'यशोदा जयंती' का पर्व मनाया जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और उन्नति की कामना के लिए पूजा-पाठ और व्रत करती हैं। इस दिन माता यशोदा की गोद में विराजमान श्रीकृष्ण के बाल रूप और मां यशोदा की पूजा की जाती हैं। माता यशोदा की वात्सल्य मिसालें आज भी दी जाती हैं।

शास्त्रों के मुताबिक, इस दिन माता यशोदा और श्री कृष्ण की पूजा-आराधना करने से संतान संबंधी सभी प्रकार की परेशानियां दूर हो जाती है। कहते हैं कि, इस दिन सच्चे मन से व्रत करने से सभी मनोकामना पूर्ण हो जाती है।

मान्यताओं के अनुसार, यशोदा जयंती के दिन अगर श्रद्धा-भाव से भगवान श्री कृष्ण और माता यशोदा जी की आराधना की जाए तो भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप के दर्शन होते हैं। यह पवित्र दिन माताओं के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है।

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