‘महामृत्युंजय मंत्र’ की महिमा जानिए, सावन में इस महामंत्र के जाप का है ऐसा महत्व
- Written By: नवभारत डेस्क
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सीमा कुमारी
नई दिल्ली: सनातन धर्म में भगवान शिव की पूजा का महत्व दूसरे देवी-देवताओं से थोड़ा अलग है। मनचाहा पति पाने की इच्छा हो या कष्टों से मुक्ति की आस, भगवान भोलेनाथ हर विपदा से अपने भक्तों को बचाते हैं। शिव को प्रसन्न करने के लिए कई मंत्रों का जिक्र शास्त्रों में किया गया है, ‘महामृत्युंजय मंत्र’ भी उनमें से एक है।
शास्त्रों में यह भी बताया गया है कि श्रावण में प्रत्येक दिन भगवान शिव के ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जाप करने से साधक को विशेष लाभ मिलता है। मान्यता है कि महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से साधकों को रोग, दोष, भय इत्यादि से मुक्ति प्राप्त हो जाती है। आइए जानें ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का महत्व और इससे जुड़े कुछ जरूरी नियम।
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मंत्र
ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्,
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृ त्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ।
लघु महामृत्युंजय मंत्र
ॐ जूं स: माम् पालय पालय स: जूं ॐ।
ज्योतिषियों के अनुसार, वैसे तो भोलेनाथ के इस चमत्कारी मंत्र का जाप किसी भी महीने में सोमवार के दिन से शुरू किया जा सकता है। लेकिन, सावन के महीने में इस मंत्र के जाप की महिमा ही अलग है।
इस मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला के साथ करना शुभ माना जाता है। सावन का महीना भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए बहुत ही शुभ होता है। भगवान भोलेनाथ के प्रिय महीने में उनके चमत्कारी महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से भोलेनाथ जल्दी अपनी कृपा बरसाते हैं। मान्यता है कि सावन के शुभ महीने में इस मंत्र का जाप 1100 बार करने से रोग-भय से मुक्ति मिल जाती है। अकाल मौत का डर भी मन से दूर हो जाता है। भोलेनाथ को समर्पित होने की वजह से सावन के महीने में ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जाप करना बहुत ही शुभफल दायक होता है। इससे जीवन में तरक्की के रास्ते खुल जाते हैं।
शास्त्र में बताया गया है भगवान भोलेनाथ के ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जो व्यक्ति सवा लाख बार जाप करता है, उन्हें जीवन में समस्त सुखों की प्राप्ति होती है। इसके साथ भोलेनाथ के लघु ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का 11 लाख बार जाप किया जाना आवश्यक है। प्रत्येक सोमवार के दिन रुद्राक्ष की एक माला ‘महामृत्युंजय जाप’ जरूर करना चाहिए। इस दौरान समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए। कहा गया है कि दोपहर 12 बजे के बाद महामृत्युंजय मंत्र का जाप नहीं करना चाहिए। मंत्र का जाप पूरा होने के बाद हवन करना बहुत ही लाभदायक साबित होता है।
