डायबिटीज का दुश्मन है 'यह' पौधा, अस्थमा और गठिया के अलावा 'इन' रोगों पर भी कसता है नकेल

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इंसुलिन प्लांट्स
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सीमा कुमारी

नवभारत डिजिटल टीम: दुनियाभर की तमाम गंभीर बीमारियों में आज डायबिटीज (Diabetes) टॉप पर है। इसका सबसे बड़ा कारण अनहेल्दी लाइफस्टाइल और गलत खानपान है। आज करोड़ों की तादाद में लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं। डायबिटीज एक आम बीमारी है, जो देश के लगभग हर दूसरे घर में देखने को मिल जाती है। यह बीमारी शरीर की इम्यूनिटी को भी काफी कम कर देती है जिससे व्यक्ति कई अन्य बीमारियों की चपेट में आ जाता है। लेकिन, आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि ऐसे में इंसुलिन को पौधा (Insulin Plants) आप इस्तेमाल कर सकती हैं। आइए जानें बलरामपुर चिकित्सालय लखनऊ के आयुर्वेदाचार्य डॉ. जितेंद्र शर्मा से इंसुलिन पौधे की पत्तियों के फायदे-

एक्सपर्ट के मुताबिक, इंसुलिन प्लांट्स (Insulin Plants) का आयुर्वेद में काफी महत्व है। इसका वैज्ञानिक नाम कोक्टस पिक्टस है और इसे क्रेप अदरक, केमुक, कुए, कीकंद, कुमुल, पकरमुला और पुष्करमूल जैसे नामों से भी जाना जाता हैं। स्वाद में इसकी पत्तियों का टेस्ट खट्टा होता है।  

इंसुलिन पौधे की पत्तियां ढेरों परेशानियों से लड़ने की क्षमता रखती हैं। खासतौर पर शुगर कंट्रोल करने में। यदि आप डायबिटीज से पीड़ित हैं तो इंसुलिन के पौधे की पत्तियां चबाना चाहिए। ऐसा करने से शुगर लेवल कंट्रोल होता है। दरअसल, इस पौधे में मौजूद प्राकृतिक रसायन इंसान के शरीर की शुगर को ग्लाइकोजन में बदल देता है, जिससे मधुमेह पीड़ितों को लाभ होता है।

रिसर्च के अनुसार, कोस्टस इग्नस की पत्तियां या चमत्कारी इंसुलिन का पौधा एक केमिकल से भरपूर होता है जो डायबिटीज के खतरे को कम करता है। इंसुलिन के पत्तों में यह ब्लड में बढ़े हुए शुगर के लेवल को कम करता है। इतना ही नहीं, इस अद्भुत पौधे की पत्तियां मूल्यवान पोषक तत्वों जैसे प्रोटीन, टरपेनोइड्स, फ्लेवोनोइड्स, एंटीऑक्सीडेंट्स, एस्कॉर्बिक एसिड, आयरन, बी कैरोटीन, कोर्सोलिक एसिड आदि से भरपूर होती है।

इंसुलिन के पौधे का लाभ लेने के लिए सबसे पहले इसकी दो पत्तियों को लेकर अच्छे से धोकर आप पीस लें। इसके बाद एक गिलास पानी में इसे घोलकर सुबह-शाम नियमित रूप से सेवन करें। इसके नियमित सेवन से डायबिटीज की बीमारी में सुधार दिखने लगता है। साथ ही कई और गंभीर बीमारियों में भी सुधार होता। जैसे- खांसी-जुकाम, स्किन-आंखों के इंफेक्शन, गर्भाशय संकुचन में, दमा, दस्त, कब्ज, दमा-गठिया आदि।

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