हीमोफीलिया के मरीजों को ये चीज़ें शामिल करनी चाहिए अपनी डाइट में, मिल सकती है बड़ी मदद
- Written By: नवभारत डेस्क
सीमा कुमारी
नई दिल्ली: हर साल 17 अप्रैल का दिन दुनियाभर में ‘वर्ल्ड हीमोफिलिया डे’ (World Hemophilia Day) के रूप में मनाया जाता है। जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को इस बीमारी के बारे में बताना और इस क्षेत्र में काम कर रहे लोगों को बढ़ावा देना है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, हीमोफीलिया एक प्रकार का ब्लीडिंग डिसऑर्डर (bleeding disorder) है। यह एक ऐसा रोग है जिसका इलाज अब भी पूरी तरह संभव नहीं है। यह किसी के संपर्क में आने से तो नहीं फैलता लेकिन यह अनुवांशिक होता है। हीमोफीलिया (Hemophilia) ब्लड से संबंधित बीमारी है, जिसमें रोगी के शरीर में खून का थक्का नहीं बनता या कम बनता है।
हीमोफिलिया A और B, गंभीर आनुवांशिक रक्तस्रावी रोग (हेमेरेजिक डिसऑर्डर) के सबसे आम प्रकार हैं। ये दोनों फैक्टर VIII और फैक्टर IX प्रोटीन की कमी के कारण होते हैं। इसके मरीजों को लंबे समय तक रक्तस्राव झेलना पड़ता है। भले ही घाव हो या नहीं। यह सब फैक्टर गतिविधि के आधार पर तय होता है। इस बीमारी में सबसे ज्यादा फोकस रक्तस्राव से बचना और उसका उपचार करना होना चाहिए। आइए जानें हीमोफिलिया के मरीजों के लिए डाइट कैसी होनी चाहिए।
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एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आयरन से भरपूर भोजन हीमोफिलिया के मरीजों के लिए लाभदायक है। आयरन लाल रक्त कोशिकाओं और इसके प्रोटीन- हीमोग्लोबिन के उत्पादन में सहायता करते हैं। आयरन से भरपूर खाद्य-संसाधनों में एनिमल प्रोटीन जैसे – बिना चर्बी का लाल मांस, लीवर (यह क्लॉटिंग फैक्टर का भी अच्छा स्रोत है), सी-फूड, पोल्ट्री प्रोडक्ट्स और हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे – गोभी, पालक, हरी फूलगोभी के अलावा किशमिश, अनाज, मटर और सूखी फलियां आदि शामिल होते हैं।
मजबूत हड्डियों के लिए शरीर में कैल्शियम की मात्रा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हीमोफीलिया के मरीजों में खून बहने के कारण कमजोर हड्डियों की शिकायत रहती है इसलिए, रोज के भोजन में कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा वाली चीजों को शामिल किया जाना चाहिए, जिससे भविष्य में जोड़ों की परेशानियों से बचा जा सके।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि, कोई भी सप्लीमेंट खाने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें, क्योंकि इनमें से कुछ खून बहने की दर या थक्का जमने के समय को आगे बढ़ा सकते हैं। ठीक उसी प्रकार, जैसे एस्पिरीन या नॉन-स्टेरॉइडल एंटीइन्फ्लेमेट्री दवाइयां करती हैं। कुछ सप्लीमेंट्स जैसे – विटामिन ई, मछली का तेल, गिंको बिलोबा, ब्रोमीलेन, फ्लैक्स सीड, लहसुन या अदरक से पूरी तरह बचने की जरूरत भी पड़ सकती है।
