

Monsoon Health Tips: स्ट्रीट फूड भारतीय संस्कृति का एक अहम हिस्सा है। मसालेदार चाट से लेकर पकौड़े, मोमोज़ और सड़क किनारे मिलने वाली चाय तक ये सभी स्वादिष्ट चीजें साल भर लोगों को पसंद आती हैं। मानसून के मौसम में गर्म और कुरकुरे स्ट्रीट फूड खाने की इच्छा और भी बढ़ जाती है।
बारिश में स्ट्रीट फूड खाना भले ही मजेदार लगे, लेकिन सेहत के लिहाज से यह नुकसानदेह है। मानसून का मौसम कीटाणुओं, वायरस और पैरासाइट्स के तेजी से पनपने का समय होता है। सही सावधानी न बरती जाएं, तो भारी बारिश, नमी, जल-जमाव और साफ-सफाई की कमी सड़क किनारे मिलने वाले खाने को असुरक्षित बनाती है।
बारिश के मौसम में ज्यादा नमी और उमस बैक्टीरिया, फंगस और वायरस के तेजी से पनपने के लिए अनुकूल माहौल बनाती है। नालियों का ओवरफ़्लो होना, गंदा पानी और साफ-सफाई की कमी से पानी दूषित हो जाता है। दूषित पानी से बनी खुली चीजें खाने से पेट और आंतों में इंफेक्शन हो सकता है।
स्ट्रीट वेंडर खुली जगहों पर काम करते हैं, इसलिए खाना धूल, मक्खियों, बारिश के गंदे पानी और प्रदूषण से सुरक्षित नहीं रह पाता। अगर साफ-सफाई का स्तर अच्छा न हो, तो बीमार पड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
बारिश के मौसम में सबसे आम स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है दस्त होना। दूषित खाना खाने या अशुद्ध पानी पीने से पाचन तंत्र बिगड़ सकता है और दस्त, पेट में मरोड़, जी मिचलाना और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
WHO के अनुसार, टाइफाइड एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है, जो दूषित खाने और पानी से फैलता है। मानसून के मौसम में यह तब खतरनाक हो जाता है जब खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाले हाथों की सफाई, बर्तनों और पानी में स्वच्छता का ध्यान न रखा जाए।
हेपेटाइटिस A लिवर का एक इन्फेक्शन है ,जो मुख्य रूप से दूषित खाने और पानी से फैलता है। यह वायरस साफ-सफाई न होने पर सड़क किनारे मिलने वाले खाने से आसानी से फैल सकता है।
बारिश के मौसम में फूड पॉइजनिंग के मामले ज्यादा बढ़ जाते हैं। ठीक से स्टोर न किया गया खाना, बासी सामग्री और खाना पकाने की दूषित जगहें खाने में हानिकारक बैक्टीरिया पैदा कर सकती हैं।
मानसून के दौरान नमी होने पर खाने की चीज़ों में फंगल कंटैमिनेशन भी हो सकता है। नमी से चटनी, सॉस, स्टोर किया हुआ खाना और ब्रेड जल्दी खराब हो सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति फंगल से दूषित मशरूम वाला खाना खाता है, तो उसे इन्फेक्शन, पाचन संबंधी समस्याएं या एलर्जी हो सकती है।
सड़क किनारे बिकने वाली कच्ची सब्जियां और सलाद दूषित पानी से धोने के कारण दूषित हो सकते हैं। इससे कीटाणु मरते नहीं हैं और शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
अगर कटे हुए फलों को खुली हवा में छोड़ दिया जाए, तो उन पर धूल, बैक्टीरिया और मक्खियाँ लग सकती हैं। बिना धुले या बिना छिले फलों या सब्जियों की सतह पर कीटाणु हो सकते हैं।
बर्फ बेचने वाले सड़क किनारे के वेंडर असुरक्षित पानी से बना उत्पाद दे सकते हैं। दूषित बर्फ खाने, पीने या उसके संपर्क में आने से पेट का इन्फेक्शन और हेपेटाइटिस A हो सकता है।
अगर सीफूड को सही तरीके से रेफ्रिजरेट न किया जाए, तो मानसून के दौरान वह जल्दी खराब हो जाता है। पुराना सीफूड खाने से पेट खराब होने और गंभीर फूड पॉइजनिंग की समस्या हो सकती है।