जल्द आने वाली है आपकी उम्र बढ़ाने वाली दवा, चूहों पर हो चुका है सफल प्रयोग

कहा जा रहा है कि जिस तरह से एक खास प्रोटीन को अवरुद्ध करने से चूहों को बीमारी से बचने और उनके जीवन को 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने में मदद मिली है। अब इसे इंसानों पर भी आजमाया जा सकता है।       
A medicine that will increase your lifespan is coming soon successful experiment done on mice
कांसेप्ट फोटो (सौं. सोशल मीडिया)
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नई दिल्ली : वैज्ञानिकों के द्वारा तरह तरह के रिसर्च किए जा रहे हैं। अब एक नए रिसर्च की चर्चा हो रही है, जिसके जरिए एक ऐसी दवा संज्ञान में आयी है, जो हमें लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जीने में मदद करने वाली है। इस दवा के जरिए एक प्रोटीन को अवरुद्ध करने से चूहों को बीमारी से बचाने में मदद मिली और उनके जीवन को 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ाया जा सका। डीकिन विश्वविद्यालय द्वारा किए गए प्रयोग पर अब लोगों की नजर है।

इस नवीनतम अध्ययन में सूजन से जुड़े एक प्रोटीन इंटरल्यूकिन-11 को लक्षित करके बनने वाली एक दवा पर चर्चा हो रही है, जिसके जरिए जीवन को 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने में मदद मिल सकती है। कहा जा रहा है कि जिस तरह से इस प्रोटीन को अवरुद्ध करने से चूहों को बीमारी से बचने और उनके जीवन को 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने में मदद मिली है। अब इसे इंसानों पर भी आजमाया जा सकता है।

रोग और उम्र बढ़ने में किसकी भूमिका

शरीर में पुरानी सूजन बीमारी पैदा करने और उम्र बढ़ने में तेजी लाने में एक खास भूमिका निभाती है। जबकि अधिक सूजन संक्रमण या चोट के लिए नुकसानदायक होती है।  अगर आपके शरीर में सूजन बनी रहती है, तो यह बहुत हानिकारक हो सकती है।

हमारी जीवनशैली, पर्यावरण और सामाजिक कारक आधुनिक दुनिया में दीर्घकालिक सूजन को बढ़ाने में अपना योगदान देते हैं। वैसे तो हम लोग पहले से ही जानते हैं कि जो बीमारियां उम्र के बढ़ने के सवालों से जुड़ी हैं, उन पर नियंत्रण की जरूरत होती है,  जिनमें खराब आहार, व्यायाम की कमी,  मोटापा,  तनाव, नींद की कमी,  सामाजिक संबंध की कमी और प्रदूषण जैसे कारक शामिल हैं। इनका असर भी शारीरिक सूजन से है। इसीलिए  बीमारी और उम्र बढ़ाने से संबंधित चीजों पर कई शोध समूह खोज कर रहे हैं। साथ ही वे फार्मास्यूटिकल्स के साथ पुरानी सूजन का इलाज करने के उपाय भी खोज रहे हैं।

क्या कहता है नवीनतम शोध 

यह नया इंटरल्यूकिन-11 अनुसंधान चूहों पर किया गया है और इसमें कई अलग-अलग घटक शामिल थे। इस शोध के एक घटक में,  चूहों में इंटरल्यूकिन-11 को आनुवंशिक रूप से नष्ट कर दिया गया था। इसका मतलब है कि इस रासायनिक मध्यस्थ के लिए जीन को इन चूहों से हटा दिया गया था, जिसके परिणामस्वरूप चूहे अब इस मध्यस्थ का उत्पादन करने में सक्षम नहीं थे। अध्ययन के इस भाग में,  चूहों का जीवन औसतन 20% से अधिक बढ़ गया।

इस शोध के एक अन्य घटक में वृद्ध चूहों का इलाज एक ऐसी दवा से करना शामिल था, जो इंटरल्यूकिन-11 को अवरुद्ध करती है। यह पाया गया कि इस दवा को 75-सप्ताह के चूहों (55-वर्षीय मनुष्यों के बराबर) में इंजेक्ट करने से चूहों का जीवन 22-25% बढ़ जाता है।

इन उपचारित चूहों में कैंसर होने की संभावना कम थी और उनमें कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम था, शरीर का वजन कम था और मांसपेशियों की ताकत और चयापचय में सुधार हुआ था।

तब जाकर इन संयुक्त परिणामों से  लेखकों ने काफी उचित रूप से निष्कर्ष निकाला कि इंटरल्यूकिन -11 को अवरुद्ध करना संभावित रूप से उम्र से संबंधित स्वास्थ्य प्रभावों को कम करने और चूहों और मनुष्यों दोनों में जीवनकाल में सुधार करने की कुंजी हो सकता है।

चूहों पर यह प्रयोग अब इंसानों पर कितना सफल होगा, यह जानने में वक्त लगेगा। अनुसंधान से पता चलता है कि जानवरों में आशाजनक निष्कर्षों में से केवल 5% ही मनुष्यों तक पहुंचते हैं।  यह केवल एक अध्ययन है। जिसके जरिए  हम ज्ञान खोज प्रक्रिया में अगले चरण पर आगे बढ़ने और यह जांचने पर विचार कर सकते हैं। हो सकता है यह निष्कर्ष मनुष्यों के लिए भी सच हो जाए। इस तरह की नई खोज को मनुष्यों में सफल उपचारों में बदलने करने में दशकों लग सकते हैं। तब तक,  हम उन चीजों को करने पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं, जिन्हें हम पहले से ही जानते हैं। ये आदतें स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए बहुत बड़ा अंतर डालते हैं। हमें अच्छा खाना, व्यायाम करना, स्वस्थ वजन बनाए रखना, तनाव कम करना और सामाजिक रिश्तों का पोषण करना सीखना चाहिए।

-एजेंसी इनपुट के साथ

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