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छठ में होती है भगवान सूर्य की पूजा, तो छठी मैया कौन हैं, जानिए छठ मैया की महिमा

  • Written By: वैष्णवी वंजारी
Updated On: Nov 08, 2023 | 06:12 AM
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सीमा कुमारी

नवभारत डिजिटल टीम: लोक आस्था का महापर्व ‘छठ’ (Chhath Puja 2023) की शुरुआत 17 नवंबर 2023 से हो रही है। जिसका समापन 20 नवंबर को होगा। सनातन धर्म में छठ पूजा का विशेष महत्व है। कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर नहाय-खाय से छठ पर्व का आरंभ होता है। फिर षष्ठी तिथि को मुख्य छठ व्रत करने के बाद अगले दिन सप्तमी को उगते सूरज को जल देने के बाद व्रत का समापन किया जाता है।

इस व्रत में संतान की लंबी आयु, उज्ज्वल भविष्य और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। छठ का व्रत काफी कठिन  होता है, क्योंकि इसमें व्रती को 24 घंटो से अधिक समय तक निर्जला व्रत रखना होता है। इस व्रत में मुख्य रूप से सूर्य देव और छठ माता की उपासना की जाती है और उगते वह अस्त होते सूर्य को जल दिया जाता है। ऐसे में आइए जानें आखिर क्यों किया जाता है छठ पर सूर्य पूजन और कौन हैं छठ माता (Chhath Maiya) –

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, छठ पूजा का महापर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। लेकिन इस पर्व का उल्लास पूरे देश में भी देखने को मिलता है। छठ पूजा की शुरुआत पहले दिन नहाय खाय से होता है। इसके बाद दूसरे दिन खरना और तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। वहीं चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर पर्व को समाप्त करने की परंपरा है। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, छठ पूजा का व्रत करने से परिवार में खुशहाली, संतान की दीर्धायु और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

क्यों दिया जाता है सूर्य देव को अर्घ्य ?

पौराणिक मान्यता के अनुसार, छठ पर्व का आरंभ महाभारत काल के समय में माना जाता है। कर्ण का जन्म सूर्य देव के द्वारा दिए गए वरदान के कारण कुंती के गर्भ से हुआ था। यही कारण है कर्ण सूर्य पुत्र कहलाते हैं और सूर्यनारायण की कृपा से इनको कवच व कुंडल प्राप्त हुए थे व सूर्य देव के तेज और कृपा से ही ये तेजवान व महान योद्धा बने।

कहा जाता है कि कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे और इस पर्व की शुरुआत सबसे पहले सूर्यपुत्र कर्ण ने ही सूर्य की पूजा करके की थी। कर्ण प्रतिदिन घंटों कमर तक पानी में खड़े रहकर सूर्य पूजा करते थे और उनको अर्घ्य देते थे। आज भी छठ में अर्घ्य दान की यही पद्धति प्रचलित है। इस संबंध में एक कथा और भी है कि जब पांडव अपना सारा राजपाट कौरवों से जुए में हार गए थे तब द्रौपदी ने छठ का व्रत किया था। इस व्रत से पांडवों को उनका सारा राजपाट वापस मिल गया था।

सूर्य को जीवन का आधार माना जाता है। रोजाना उगते सूर्य को जल देने से सेहत भी ठीक रहती है। जीवन में जल और सूर्य की महत्ता को देखते हुए छठ पर्व पर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके अलावा सूर्य को जल देने का ज्योतिष महत्व भी माना जाता है। भगवान सूर्य नारायण की कृपा से व्यक्ति को तेज व मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।

Glory of chhath maiya

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Published On: Nov 08, 2023 | 06:12 AM

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