जानिए सुहागनें क्यों करती हैं वट वृक्ष की पूजा, क्या है पौराणिक कथा?
- Written By: नवभारत डेस्क
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-सीमा कुमारी
हिंदू धर्म में ‘वट सावित्री’व्रत का बड़ा महत्व है। ‘वट सावित्री व्रत’ स्त्रियां सौभाग्य प्राप्ति और पति की लंबी आयु की कामना के लिए रखती हैं। वट सावित्री व्रत में वट, यानी बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, वट के वृक्ष ने सावित्री के पति सत्यवान के मृत शरीर को अपनी जटाओं के घेरे में सुरक्षित रखा था, ताकि जंगली जानवर शरीर को नुकसान नहीं पहुंचा सके। ज्योतिषियों के अनुसार, वट के वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का निवास होता है इसलिए भी महिलाएं इस वृक्ष की पूजा करती हैं।
कथा के अनुसार, मद्र देश के राजा अश्वपति की कोई संतान न थी। उन्होंने सावित्री देवी का कठिन यज्ञ किया और जिससे उनके घर देवी की कृपा से एक तेजस्वनी कन्या का जन्म हुआ। राजा ने कन्या का नाम सावित्री ही रखा। कन्या बड़ी होकर बड़ी रूपवती हुई। बड़ी होने पर राजकुमारी सावित्री को साल्व देश के राजा के पुत्र सत्यवान से प्रेम हो गया। अब सावित्री सत्यवान को पति के रूप में पाना चाहती थी।
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नारद मुनि ने सावित्री से मिलकर सत्यवान से विवाह न करने की सलाह दी थी क्योंकि सत्यवान अल्पायु थे, लेकिन फिर भी सावित्री ने सत्यवान से ही विवाह रचाया। पति की मृत्यु की तिथि में जब कुछ दिन शेष रह गए तब सावित्री ने घोर तपस्या की थी, जिसका फल उन्हें बाद में मिला था। सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और श्रद्धा से यमराज द्वारा अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे और लंबे समय तक वैवाहिक जीवन का आनंद प्राप्त किया। इस कारण से ऐसी मान्यता चली आ रही है कि जो स्त्री सावित्री के समान यह व्रत करती है उसके पति पर भी आनेवाले सभी संकट इस पूजन से दूर होते हैं।
