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रमज़ान में होगी ‘रहमतों की बारिश’, रोज़ा के दिनों में सहरी और इफ़्तार में इन बातों का ज़रूर रखें ख़्याल, जानें इसका समय

  • Written By: नवभारत डेस्क
Updated On: Apr 01, 2022 | 08:00 AM

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-सीमा कुमारी

हर साल की तरह इस साल भी ‘रमज़ान’ (Ramadan 2022) का पवित्र महीना शुरू होने ही वाला है। इस साल यह पाक महीना 2 अप्रैल से शुरू होकर इसका समापन 2 मई को होगा। इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक, यह महीना ‘अल्लाह से इबादत’ का महीना होता है। मान्यताएं हैं कि, रमजान के अवसर पर दिल से अल्लाह की बंदगी करने वाले हर इंसान की ख्वाहिशें अवश्य पूरी होती हैं। इस दौरान महीने भर रोजे रखे जाते हैं।  

वैसे, रमजान के महीने की शुरुआत चांद के दिखाई देने पर निर्भर करती हैं। माना जाता है कि, इसी महीने में पैगंबर मुहम्मद (Paigambar Muhammad) के सामने इस्लाम की पवित्र किताब का अनावरण हुआ था। इसके बाद से ही इस्लाम (Islam) में इस महीने को पवित्र माना गया और रोजा रखने की परंपरा शुरू हुई। समूची दुनियाभर में मुस्लिम समुदाय के लोगों को इस पवित्र महीने का बेसर्बी से इंतजार रहता हैं। रमजान के ठीक बाद ‘ईद उल फितर’ (Eid-ul-Fitar)यानी ईद का त्योहार पूरे देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

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हालांकि, रमजान की डेट पूरी तरह से चांद पर निर्भर करती है। रमजान का महीना कभी 29 दिन का तो कभी 30 दिन का होता है।  

इस्लामिक धर्म गुरु के अनुसार, रमजान के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग पूरे एक महीने तक रोजा रखते हैं। मुस्लिम लोग इस दौरान सूरज उगने के बाद से रोजा रखते हैं और सूरज ढलने के बाद इसे खोलते है। सूरज उगने से पहले खाना खाते हैं, इसे ‘सहरी’ के नाम से जाना जाता है। सूरज ढलने के बाद नमाज पढ़ी जाती है, जिसके बाद रोजा खोला जाता है। इसे इफ़्तार’ के नाम से भी जाना जाता है। 

सभी लोगों के लिए रमजान के दौरान रोजा रखना अनिवार्य माना जाता है। सिर्फ नवजात बच्चों, महिलाओं, गर्भवती औरतों और माहवारी के दौरान महिलाओं को रोज़ा न रखने की छूट होती है। इसके अलावा, जो लोग बीमार हैं उन्हें भी रोजा ना रखने की छूट होती है। आइए  जानें रोजा रखने के नियम के बारे में-

रमजान के दौरान, मुसलमानों से उम्मीद की जाती है कि, वे अपने आध्यात्मिक स्तर को ऊंचा करें और ईश्वर के प्रति समर्पण का भाव रखें। ऐसे में रमजान के दौरान कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरूरी होता है।

इस्लामिक धर्म गुरु के मुताबिक, रोजे की हिफाजत जुबान से करनी चाहिए। रोजे के दौरान आंख, कान और जीभ का भी रोजा रखा जाता है। इसका मतलब ये है  कि, कुछ बुरा न देखें, न बुरा सुनें और न ही बुरा बोलें। इसके अलावा, रोजे के दौरान मन में बुरे विचार या शारीरिक संबंधों के बारे में सोचने की भी मनाही होती है। कहते है कि ऐसा सोचने से रोजा टूट जाता है। इसलिए ऐसी गलती भूल से भी ना करें।

इस्लामिक धर्म गुरु बताते है कि, रोजा रखने वाले को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि दांत में फंसा हुआ खाना जानबूझकर न निगलें। नहीं तो रोज़ा टूट जाता है।

During fasting of ramadan keep these things in mind know timing of it

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Published On: Apr 01, 2022 | 08:00 AM

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