

JPSC Job Rate Chart In Jharkhand Assembly: झारखंड की राजनीति में इस समय एक बड़ा भूचाल आया हुआ है। राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों का गुस्सा अब सड़कों से लेकर विधानसभा तक पहुंच गया है। JPSC और JSSC CGL जैसी बड़ी परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर मचे बवाल के बीच विपक्ष ने सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान NDA के विधायक निर्मल महतो ने एक ऐसा 'रेट चार्ट' पेश किया, जिसने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी है।
झारखंड विधानसभा में उस वक्त स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब विपक्ष के एक विधायक हाथ में पोस्टर लेकर पहुंचे, जिस पर राज्य की विभिन्न सरकारी नौकरियों के 'रेट' लिखे हुए थे। विधायक निर्मल महतो का आरोप है कि झारखंड में नौकरियां योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि पैसे के दम पर बिक रही हैं।
विधायक द्वारा दिखाए गए पोस्टर के अनुसार, झारखंड सरकार में पदों की कीमतें कुछ इस प्रकार तय की गई हैं:
DSP: 1.2 करोड़ रुपये
BDO: 90 लाख रुपये
CO: 1 करोड़ रुपये
FRO: 80 लाख रुपये
CGL: 70 लाख रुपये
SI (सब-इंस्पेक्टर): 39 लाख रुपये
PGT: 30 लाख रुपये
विधायक ने यहां तक आरोप लगाया कि रैंक के आधार पर रेट अलग-अलग हैं। अगर कोई अभ्यर्थी परीक्षा में कम लिखना चाहता है, तो उसे अधिक पैसे देने होंगे, जबकि अधिक लिखने वालों के लिए रेट थोड़ा कम है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि राजस्थान, यूपी या बिहार, कहीं के भी लोग पैसे देकर यहां नौकरी पा सकते हैं।
एक तरफ सदन में आरोपों की बौछार हो रही है, तो दूसरी तरफ रांची की सड़कों पर छात्र अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं। JPSC और JSSC परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं के खिलाफ छात्र पिछले तीन दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का नेतृत्व कर रहे राहुल क्रांति का कहना है कि सरकार उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दे रही है।
छात्रों की स्पष्ट मांग है कि या तो इन परीक्षाओं की CBI जांच कराई जाए या फिर जिम्मेदार लोग इस्तीफा दें। गौर करने वाली बात यह है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास ही राज्य का शिक्षा मंत्रालय भी है, लेकिन छात्रों का आरोप है कि सीएम ने अभी तक उनका हाल-चाल जानने या नैतिक समर्थन देने की भी जहमत नहीं उठाई है।
विपक्ष के बढ़ते दबाव और छात्रों के आक्रोश को देखते हुए सरकार अब बैकफुट पर नजर आ रही है। स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने एक हाई लेवल टीम का गठन किया है, जिसमें चार मंत्रियों को शामिल किया गया है। यह टीम प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत करेगी। हालांकि, छात्रों और सरकार के बीच बातचीत की जगह को लेकर अभी पेंच फंसा हुआ है। छात्र चाहते हैं कि यह मीटिंग किसी ऐसी जगह हो जहां मीडिया को आने की अनुमति हो, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
झारखंड में यह आंदोलन अब और उग्र होने वाला है। छात्रों ने अपनी मांगों को मनवाने के लिए 10 अगस्त को राज्य विधानसभा के घेराव की योजना बनाई है। विपक्ष (NDA) ने भी पूरी तरह से छात्रों के सुर में सुर मिलाते हुए सीबीआई जांच की मांग का समर्थन किया है।
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो, जो पहले भी कई चुनावों में अपनी किस्मत आजमा चुके हैं, इस आंदोलन का एक प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार के मंत्रियों की कमेटी छात्रों को संतुष्ट कर पाती है या 10 अगस्त को रांची की सड़कों पर एक बड़ा संग्राम देखने को मिलेगा। छात्रों का सीधा सवाल है कि "अगर सरकार की जांच एजेंसियां सही काम कर रही हैं, तो उन्हें CBI जांच के आदेश देने में डर क्यों लग रहा है?"।