48 घंटे में 3 बच्चों की मौत! झारखंड में ब्रेन मलेरिया ने मचाया हड़कंप

Children Deaths Jharkhand: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम में ब्रेन मलेरिया का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में 15 बच्चे भर्ती हैं, जबकि 48 घंटे में तीन बच्चों की मौत हो चुकी है।
3 children die in 48 hours! Brain malaria sparks panic in Jharkhand.
एमजीएम अस्पताल (सोर्स सोसल मीडिया)
Published on: 
Updated on: 

Jharkhand Brain Malaria: झारखंड में जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में ब्रेन मलेरिया के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। ऐसे में अस्पताल के शिशु रोग विभाग में पूरे पूर्वी सिंहभूम जिले के अलग-अलग प्रखंडों से आए 15 मासूम बच्चे जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। इन सभी बच्चों में ब्रेन मलेरिया की पुष्टि हुई है।

दो दिनों के भीतर तीन स्कूली बच्चों की मौत

शिशु रोग विभाग के डॉक्टर केके चौधरी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि पिछले एक हफ्ते के भीतर अचानक से दिमागी बुखार की शिकायत के साथ बच्चों के आने का सिलसिला बढ़ गया है। शिशु रोग वार्ड के बेड पूरी तरह से भर चुके हैं। आपको बता दें कि पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड में पिछले दो दिनों के भीतर तीन स्कूली बच्चों की मौत से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।

सांस लेने में तकलीफ के कारण वेंटिलेटर पर रखा

बता दें कि एक ही परिवार के दो लोग मलेरिया से पीड़ित हैं। जिसमें आठ वर्षीय सुबोला सरदार की मौत हो गई है। वहीं उसकी बहन खुशबू सरदार गंभीर बनी हुई है। उसे ब्रेन मलेरिया, गंभीर एनीमिया, दौरे और सांस लेने में तकलीफ के कारण वेंटिलेटर पर रखा गया है।

हालत नाजुक बनी हुई है।

वहीं दूसरी तरफ पोटका सेरेलाडीह निवासी मंगल भूमिज व उसका एक वर्षीय बेटा अभिजीत भूमिज मलेरिया से पीड़ित है। पोटका से बेहतर इलाज के लिए दोनों को एमजीएम अस्पताल लाया गया है। यहां भर्ती बच्चों में से पांच की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जिनका इलाज एनआइसीयू में चल रहा है। हालत नाजुक बनी हुई है।

ब्रेन मलेरिया का सबसे घातक रूप है।

आईएएनएस से बातचीत करते हुए जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ मृत्युंजय धाउड़िया ने कहा कि ब्रेन मलेरिया का सबसे घातक रूप है। समय पर इलाज न मिलने पर इसमें मृत्यु दर 15 से 20 प्रतिशत तक होती है। वहीं बिना इलाज के यह 90 प्रतिशत जानलेवा है। डॉक्टरों ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अनिवार्य रूप से मच्छरदानी का उपयोग करें, घरों के आसपास जलजमाव न होने दें और बुखार आने पर बिना लापरवाही किए तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं।

सीएचसी पोटका की प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रजनी महाकुड़ ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार कैंप कर रही हैं। राहत की बात यह रही कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा सानग्राम गांव में लगाए गए विशेष जांच शिविर में 68 लोगों की जांच की गई, जहां कोई नया पॉजिटिव केस नहीं मिला।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com