

Kashmir Ladakh All Weather Connectivity: आज यानी 9 जून का दिन जम्मू कश्मीर और लद्दाख के लिए ऐतिहासिक रहा। जम्मू कश्मीर को लद्दाख से जोड़ने वाली 11,500 फीट की ऊंचाई पर बनी दुनिया की सबसे लंबी सिंगल-ट्यूब, दोनों तरफ से आने-जाने वाली सड़क सुरंग, जोजिला टनल में आखिरी कामयाबी (ब्रेकथ्रू) हासिल कर ली गई है। इस ऐतिहासिक पल के गवाह केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी बने।
इस दौरान जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भी मौजूद थे। इस टनल के बन जाने के बाद अब कश्मीर से लद्दाक के बीच ऑल वेदर रास्ता बनने का सपना पूरा हो गया।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ज़ोजिला सुरंग के अंतिम चरण (ब्रेकथ्रू) की शुरुआत की। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 13.15 किलोमीटर लंबी जोजिला सुरंग जम्मू-कश्मीर को लद्दाख से जोड़ेगी। यह भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि देश कश्मीर और लद्दाख के बीच हर मौसम में कनेक्टिविटी हासिल करने के करीब पहुंच रहा है। इस मौके पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी मौजूद थे।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में J&K के LG मनोज सिन्हा ने ब्रेकथ्रू पर जानकारी देते हुए कहा, यह निश्चित रूप से एक ऐतिहासिक मौका है, क्योंकि आज केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने लद्दाख के लोगों को हर मौसम में कनेक्टिविटी देने की दिशा में आखिरी अहम पड़ाव हासिल कर लिया है। मैं लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के लोगों को दिल से बधाई देता हूं। आप सभी ने वीडियो देखा है, और हमने मंत्री जी के साथ खुद साइट का दौरा किया और वहां का नजारा देखा।
LG मनोज सिन्हा ने इंजीनियरों की प्रशंसा करते हुए कहा, इस प्रोजेक्ट पर काम करने वाले सभी इंजीनियरों और कर्मचारियों को बधाई देता हूं। इतनी ज्यादा ऊंचाई और मुश्किल हालात में अपनी ज़िम्मेदारियां निभाने के लिए मैं उनकी तारीफ करना चाहता हूं। हम सभी जानते हैं कि कनेक्टिविटी से ही विकास और आर्थिक समृद्धि आती है। पिछले 12 सालों में भारत ने पूरे देश में इस सेक्टर में अभूतपूर्व काम देखा है।
जोजिला प्रोजेक्ट के अथॉरिटी इंजीनियर अवधेश प्रताप मिश्र ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि 13.2 किलोमीटर का ब्रेकथ्रू, जिसे हम अपनी भाषा में 'डेलाइटिंग' कहते हैं, आज हो रहा है और यह देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इसके बाद हम बाकी बचा हुआ निर्माण कार्य करेंगे और लगभग डेढ़ से दो साल में सुरंग का काम पूरा कर लेंगे।