

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है। चुनाव आयोग ने तारीखों का ऐलान कर दिया है। जिसके बाद सारी पार्टियां अपनी आखिरी कोशिश में जुटी है। कांग्रेस पार्टी और NC गठबंधन में चुनाव लड़ने का ऐलान किया है, सीट बंटवारा भी फाइनल हो चुका है। इस गठबंधन ने अपनी आखिरी कोशिश में चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर चुके उमर अब्दुल्ला को एक नहीं बल्कि दो-दो सीटों का भार दिया है।
चुनाव के ऐलान के साथ उमर अब्दुल्ला ने बयान दिया था कि वो ये चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। हालांकि अब उन्होंने बताया कि वो बड़गाम के साथ साथ गांदरबल से भी चुनाव लड़ेगे। इस फैसले के पीछे की वजह क्या उनका अंतर्मन या राहुल गांधी के द्वारा दिया गया कोई मंत्र है?
गांदरबल से नामांकन दाखिल करते हुए उमर अब्दुल्ला ने लोगों से काफी इमोशनल अपील की है। उन्होंने अपने हाथों में टोपी को पकड़ कर कहा, 'आज मैं आपसे सिर्फ एक बात कहूंगा। मेरी पगड़ी, मेरी इज्जत और ये टोपी आपके हाथों में है।' लोकसभा चुनाव में उमर अब्दुल्ला को करारी शिकस्त मिली थी। जेल में बंद शेख अब्दुल राशिद ने दो लाख के वोट अंतर से उन्हें बारामूला से हरा दिया था। शेख अब्दुल राशिद को इंजीनियर राशिद के नाम से भी जाना जाता है, इन्हें सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग केस में 2017 में जेल भेजा गया था।
गांदरबल विधानसभा क्षेत्र अब्दुल्ला परिवार का गढ़ माना जाता है। इस सीट से नेशनल कांफ्रेंस के संस्थापक शेख अब्दुल्ला और उनके बेटे फारूक अब्दुल्ला को जीत मिलते रही है। वहीं फारुक अब्दुल्ला को भी 2008 में जीत मिला था। हालांकि पहली बार चुनाव लड़ने उतरे उमर अब्दुल्ला को 2002 में अपने ही गढ़ में हार मिली थी।
जम्मू-कश्मीर में INDIA ब्लॉक के बैनर तले नेशनल कांफ्रेंस, कांग्रेस, सीपीएम और पैंथर्स पार्टी लड़ रही है। 90 सीटों पर होने वाले विधानसभा चुनाव में NC 51 सीट और कांग्रेस 32 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। वहीं सीपीएम और पैंथर्स पार्टी को एक:एक सीट दी गई है। हालाांकि चुनाव ना लड़ने के पीछे उमर अब्दुल्ला ने कुछ खास कारण नहीं बताया था लेकिन राहुल गांधी के दौरे के बाद उनके फैसले का बदलना काफी दिलचस्प वाकया रहा।