

Ayatollah Ali Khamenei Funeral: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे में शामिल होने के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंच गया है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने तेहरान पहुंचकर खामेनेई को श्रद्धांजलि दी, इस दौरान जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भावुक हो उठी। उन्होंने अली खामेनेई को लहरों के खिलाफ लड़ने वाले मसीहा बताया।
महबूबा मुफ्ती ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई की शहादत पर अपनी गहरी संवेदना और एकजुटता दिखाने के लिए तेहरान में होना मेरे लिए सम्मान की बात है। वह एक सम्मानित लीडर जिन्होंने लहर के खिलाफ खड़े होने और दबे-कुचले लोगों के लिए लड़ने की हिम्मत की।
भारत ने अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे में शामिल होने के एक छोटा मगर मजबूत प्रतिनिधिमंडल ईरान भेजा है। इसमें बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन, उपविदेश मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा, कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद, जम्मू और कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (JKPDP ) की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और जैन मुनि शामिल है। यह प्रतिनिधिमंडल 9 जुलाई तक ईरान में रहेगा और खामेनेई के जनाजे में शामिल होगा।
महबूबा मुफ्ती का प्रतिनिधिमंडल के साथ ईरान जाना कई मायनों में महत्वपूर्ण है। वो जम्मू-कश्मीर की एकमात्र ऐसी राजनीतिक नेता हैं जो शिया नहीं हैं। इसके बाद भी सरकार ने उन्हें खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भेजा है। जानकारी के मुताबिक, मुफ्ती को जनाजे में शामिल होने का निमंत्रण नये सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के कार्यालय से मिला है। क्योंंकि युद्ध के दौरान उन्होंने खुलकर अमेरिकी हमले की आलोचना की थी और ईरान का समर्थन कियाा था।
मुफ्ती ने इससे पहले राजधानी दिल्ली में स्थित ईरानी दूतावास में जाकर भी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को श्रद्धांजलि दी थी। सोशल मीडिया पर महबूबा मुफ्ती का खामेनेई को श्रद्धांजलि का वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें वो काफी भावुक नजर आ रही हैं।
बता दें कि अली खामेनेई की मौत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमले में हो गई थी। इस्लाम में मौत के कुछ समय बाद दफनाने का रिवाज है, लेकिन ईरान बिते चार महीने से अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जंग लड़ रहा था। इसके चलते अंतिम संस्कार को टाल दिया गया था और खामेनेई के शरीर को सुरक्षित स्थान पर छिपाकर रखा गया था।