इंडियान आर्मी के कुत्ते।
Jammu Kashmir Encounter News : भारतीय सेना के मूक योद्धाओं की बहादुरी की दास्तां जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ से एक बार फिर सामने आई है। सुरक्षाबलों ने एक भीषण मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद के तीन खूंखार आतंकियों को ढेर कर दिया, लेकिन इस कामयाबी के पीछे सेना के जांबाज डॉग ‘टायसन’ का सर्वोच्च साहस छिपा है। जर्मन शेफर्ड नस्ल के टायसन ने न केवल अपनी जान जोखिम में डालकर आतंकियों के सटीक ठिकाने का पता लगाया, बल्कि आतंकियों की पहली गोली भी अपने शरीर पर झेली।
पैर में गोली लगने के बावजूद यह योद्धा पीछे नहीं हटा। टायसन की बहादुरी के कारण ही आतंकियों की लोकेशन स्पष्ट हो सकी और सेना उन्हें मार गिराने में सफल रही। घायल टायसन को तत्काल एयरलिफ्ट कर उधमपुर के सैन्य अस्पताल पहुंचाया गया है।
यह कोई पहली बार नहीं है जब सेना के इन वफादार सैनिकों ने इंसानियत और देश की रक्षा के लिए अपना खून बहाया है। भारतीय सेना का इतिहास ऐसे ‘चार पैरों वाले नायकों’ के बलिदान से भरा पड़ा है। महज चार महीने पहले अक्टूबर 2024 में ‘फैंटम’ नामक जांबाज डॉग ने अखनूर सेक्टर में आतंकियों से लोहा लेते हुए अपनी शहादत दी थी। फैंटम की फुर्ती और वफादारी ने उस वक्त कई सैनिकों की जान बचाई थी।
इसी तरह सितंबर 2023 में राजौरी के जंगलों में फीमेल लेब्राडोर ‘केंट’ ने अपने हैंडलर को आतंकियों की गोली से बचाने के लिए खुद के प्राण न्यौछावर कर दिए थे। केंट आतंकियों का पीछा करते हुए सबसे आगे चल रही थी और उसकी शहादत के बाद ही सेना ने दो आतंकियों को मार गिराया था। केंट को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई थी।
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अक्टूबर 2022 में ‘जूम’ नामक जर्मन शेफर्ड ने भी ऐसी ही वीरता दिखाई थी। दक्षिण कश्मीर के तंगपावा में एक घर के भीतर छिपे आतंकियों पर जूम ने घायल होने के बावजूद हमला जारी रखा था। जूम को मरणोपरांत वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वहीं जुलाई 2022 में बारामूला में ‘एक्सल’ ने लश्कर के आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन में अपनी जान दी थी। ये बेजुबान योद्धा यह साबित करते हैं कि देशभक्ति केवल शब्दों की मोहताज नहीं होती। आर्मी डॉग टायसन, फैंटम, केंट और जूम जैसे नाम भारतीय सेना की उस अटूट परंपरा का हिस्सा हैं, जहां वफादारी की कीमत अपनी जान देकर चुकाई जाती है।