BJP को पहले से था विधेयक गिरने का अंदाजा, विपक्ष को विलेन बनाने के लिए महिला आरक्षण में संशोधन का खेला दांव?
BJP vs Congress: लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण महिला आरक्षण संशोधन विधेयक गिरा। बीजेपी ने विपक्ष को घेरा, तो अशोक गहलोत ने इसे सरकार की सोची-समझी चुनावी रणनीति और बड़ी साजिश करार दिया।
- Written By: अर्पित शुक्ला
पीएम मोदी, राहुल गांधी (Image- Social Media)
Women Reservation Bill: महिला आरक्षण संशोधन विधेयक 2023 और परिसीमन विधेयक 2026 समेत तीन अहम बिलों को पारित कराने के लिए पांच राज्यों के चुनाव के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाया गया। पहले ही दिन इन विधेयकों पर देर रात, करीब 1 बजे के बाद तक चर्चा चली। 17 अप्रैल को सरकार ने महिला आरक्षण कानून लागू करने की अधिसूचना भी जारी की, लेकिन शाम को लोकसभा में वोटिंग के दौरान यह विधेयक पारित नहीं हो सका।
विधेयक गिरते ही Bharatiya Janata Party (बीजेपी) ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि कांग्रेस समेत अन्य दल महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ हैं। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Ashok Gehlot ने पलटवार करते हुए कहा कि यह पूरा घटनाक्रम एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था, ताकि चुनावों के बीच बिना पर्याप्त संवाद के ऐसी स्थिति बनाई जाए, जिसमें बिल पास न हो और दोष विपक्ष पर डाला जा सके।
2023 में पारित मूल विधेयक हो लागू
वोटिंग से पहले Narendra Modi ने सोशल मीडिया के जरिए सभी सांसदों, खासकर विपक्ष से, विधेयक के समर्थन में वोट देने की अपील की थी। दूसरी ओर विपक्षी दलों का कहना था कि 2023 में पारित मूल विधेयक को ही लागू किया जाना चाहिए और इसमें संशोधन की जरूरत स्पष्ट नहीं है।
सम्बंधित ख़बरें
संसद में नासिक के सांसद का सरकार को सीधा चैलेंज, ‘हिम्मत है तो बिना शर्त लागू करें महिला आरक्षण’
विपक्ष को भारी पड़ेगा महिला आरक्षण का विरोध? बीजेपी ने बनाया बंगाल-तमिलनाडु चुनाव के लिए मास्टरप्लान!
महिला आरक्षण बिल का विरोध कर बुरी फंसी विपक्ष, अब BJP सड़कों पर उठाएगी यह मुद्दा; जानें आगे की पूरी रणनीति
महिला आरक्षण बिल: विपक्ष पर बरसे किरेन रिजिजू, कहा- महिलाओं को हक देने का ऐतिहासिक मौका गंवाया
अशोक गहलोत ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री Amit Shah को शुरुआत से ही पता था कि संविधान संशोधन विधेयक विपक्ष के सहयोग के बिना पारित नहीं हो सकता, इसके बावजूद विपक्षी दलों को विश्वास में नहीं लिया गया।
विपक्ष में विभाजन पैदा करने की कोशिश
गहलोत के अनुसार, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता Mallikarjun Kharge लगातार इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक की मांग कर रहे थे। उनका आरोप है कि प्रधानमंत्री ने सभी दलों को एक साथ बुलाने के बजाय अलग-अलग बातचीत कर विपक्ष में विभाजन पैदा करने की कोशिश की।
लोकसभा में ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ पर हुए मत विभाजन में 298 वोट समर्थन में और 230 वोट विरोध में पड़े। कुल 528 सदस्यों ने मतदान में हिस्सा लिया, लेकिन बिल पास होने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट नहीं मिल सके, जिसके कारण यह गिर गया।
यह भी पढ़ें- विपक्ष को भारी पड़ेगा महिला आरक्षण का विरोध? बीजेपी ने बनाया बंगाल-तमिलनाडु चुनाव के लिए मास्टरप्लान!
चुनावी रणनीति में मुद्दे का इस्तेमाल
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी इस मुद्दे को आगे भी चुनावी रणनीति में इस्तेमाल कर सकती है। महिला वोटर्स को साधने के लिए पार्टी पहले भी कई कदम उठाती रही है। ऐसे में, चाहे बिल पास होता या गिरता, दोनों ही परिस्थितियों में इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया जा सकता था। अब इसको लेकर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है, और 2029 के आम चुनावों तक भी यह मुद्दा प्रभावी रह सकता है।
