प्रवासी भारतीय दिवस (कांसेप्ट फोटो सौ. सोशल मीडिया)
नवभारत डेस्क: प्रवासी भारतीय दिवस हर साल 9 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन उन सभी भारतीयों के योगदान को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है, जो विदेशों में रहकर भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। इस दिन का इतिहास महात्मा गांधी से जुड़ा है, जो 9 जनवरी 1915 को दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे। उन्होंने भारत की आज़ादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, इसलिए ये दिन खास महत्व रखता है।
इस साल प्रवासी भारतीय दिवस का 18वां सम्मेलन ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में 8 से 10 जनवरी के बीच आयोजित किया गया है। यह पहली बार है जब ओडिशा में यह आयोजन हो रहा है। इस बार की थीम है “विकसित भारत में प्रवासी भारतीयों का योगदान”। इस थीम के माध्यम से प्रवासी भारतीयों के भारत के विकास में योगदान को रेखांकित किया जाएगा।
आयोजन के दौरान कई प्रमुख कार्यक्रम होंगे, जैसे:
युवा प्रवासी भारतीय दिवस
मुख्य उद्घाटन समारोह
समापन समारोह
समापन समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार दिए जाएंगे। ये पुरस्कार उन प्रवासी भारतीयों को दिए जाते हैं, जिन्होंने अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य किया है।
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ओडिशा सरकार इस आयोजन को सफल बनाने के लिए पूरी तैयारी की है। भुवनेश्वर की सड़कों को सजाया गया है, प्रमुख पर्यटन स्थलों की सफाई की गई है तथा मेहमानों के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। ये आयोजन ओडिशा की समृद्ध संस्कृति और विकास को वैश्विक मंच पर दिखाने का अवसर भी है।
यह दिन न सिर्फ प्रवासी भारतीयों को भारत से जोड़ने का एक माध्यम है, बल्कि यह विश्व स्तर पर भारतीय संस्कृति और पहचान को मजबूत करता है। प्रवासी भारतीय दिवस हमें याद दिलाता है कि विदेशों में बसे भारतीय, भारत की ताकत तथा उसकी प्रतिष्ठा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
प्रवासी भारतीय दिवस भारत और विदेशों में रहने वाले भारतीयों के बीच एक पुल का काम करता है और हमें गर्व से भर देता है। यह हमें एक समृद्ध और शक्तिशाली भारत बनाने की प्रेरणा देता है।