नरेंद्र मोदी, जॉर्ज सोरोस (फोटो- सोशल मीडिया)
बेंगलुरूः George Soros ED Raid अक्सर भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बोलेने अरबपति जॉर्ज सोरोस से जुड़े NGO पर ईडी ने छापेमारी की है। बेंगलुरू स्थित जॉर्ज सोरोस के ओपन सोरोस फाउंडेशन और एमनेस्टी इंटरनेशनल के दफ्तरों पर रेड की गई है।
एजेंसी ने एमनेस्टी और ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) के पूर्व-वर्तमान कर्मचारियों के घरों की भी तालाशी ली। रिपोर्ट्स के मुताबिक ED की कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम (FEMA) के उल्लंघन को लेकर हुई। छापे को लेकर OSF की तरफ से फिलहाल आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।
जानें पूरा मामला
दरअसल एमनेस्टी इंटरनेशनल, जो एक मनवाधिकारों की सुरक्षा करने वाला एनजीओ है। इस पर अवैध विदेशी फंडिग का आरोप लगा था, जिसके कारण एमनेस्टी के सभी बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए थे। 2020 में एनजीओ ने अपनी सारी गतिविधियां भारत में बंदी कर दी थी। इसके बाद एमनेस्टी इंटरनेशनल और राट्स वॉच पर ओपन सोरोस फाउंडेशन से फंडिग लेने का आरोप लगा। मामले में सीबीआई ने चार्जशीट फाइल कर चुकी है। यह पूरा मामला वित्तीय गतिविधी से जुड़ा हुआ है, इसलिए अब इसकी जांच ईडी कर रही है।
पीएम मोदी के खिलाफ अक्सर करते हैं सोरोस तल्ख टिप्पणी
गौरतलब है कि जॉर्ज सोरोस भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अक्सर आलोचना करते रहते हैं। उन्होंने पीएम मोदी को अलोकतांत्रिक व्यक्ति तक कहा है। इतना ही नहीं उनके नेता बनने के कारण भी उन्होंने मुस्लिमों के साथ हुई हिंसा बताया है। इसके अलावा सीएए और जम्मू-कश्मीर से अर्टिकल 370 हटाए जानें पर सोरोस ने सरकार के खिलाफ तल्ख टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि भारत हिंदू राष्ट्र बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
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कौन हैं जॉर्ज सोरोस
92 साल के जॉर्ज सोरोस दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक हैं। सोरोस एक यहूदी हैं, जिस वजह से सेकेंड वर्ल्ड वॉर के समय उन्हें अपना देश हंगरी छोड़ना पड़ा था। 1947 में वे लंदन पहुंचे। उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में फिलासफी की पढ़ाई की। फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक साल 16 सितंबर 1992 में ब्रिटेन की करेंसी पाउंड में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। जिसके पीछे जॉर्ज सोरोस का हाथ माना गया था।