

What Is One Case, One Data System: देश की ज्यूडिशियल सिस्टम को डिजिटल और टेक्नोलॉजी आधारित बनाने की दिशा में सीजेआई सुर्यकांत ने सोमवार को दो बड़ी पहल की शुरुआत की। सुप्रीम कोर्ट में दिन की कार्यवाही शुरू होने से पहले मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि ज्यूडिशरी 'वन केस वन डेटा' (One Case, One Data) सिस्टम के नाम से नई डिजिटल पहल की शुरुआत करने जा रही है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने अपनी वेबसाइट पर 'सु सहायक' नाम से एआई आधारित चैटबॉट लॉन्च किया है।
यह चैटबॉट नागरिकों और वादियों को कोर्ट की सेवाओं तक आसान पहुंच उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया गया है। सीजेई ने कहा कि इस चैटबॉट को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के सहयोग से तैयार किया है।
वन केस, वन डेटा सिस्टम सुप्रीम कोर्ट द्वारा शुरु किया गया एक डिजिटल पहल है। इस सिस्टम के तहत देशभर के सभी हाईकोर्ट, डिस्ट्रिक्ट कोर्ट और तालुका अदालतों की बहु-स्तरीय सूचनाओं को इंटीग्रेटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इस सिस्टम में किसी केस से जुड़ी अलग-अलग कोर्ट के जानकारी एक ही जगह पर उपलब्ध होगी, जिससे केस ट्रैकिंग और प्रबंधन अधिक प्रभावी हो सकेगा।
वन केस-वन डेटा सिस्टम पहल शुरू करने को लेकर देश के मुख्य न्यायाधिश सूर्यकांत ने कहा कि ज्यूडिशरी एक ऐसे मॉर्डन केस मैनेजमेंट सिस्टम की दिशा में काम कर रही है, जो देश के अलग-अलग अदालतों के बीच बेहतर को-ऑर्डिनेशन के साथ-साथ सुनवाई प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करेगा।
इस डिजिटल पहल का मुख्य उद्देश्य ज्यूडिशियल डेटा को इंटीग्रेट करना, केस रिकॉर्ड्स को डिजिटल रूप से जोड़ना और कोर्ट में पेंडिंग मामलों की निगरानी को आसान बनाना है। सीजेआई ने कहा कि यह पहल देश की अदालतों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को तेज और अधिक पारदर्शी बनाएगी। इससे न केवल न्यायिक प्रशासन को मजबूती मिलेगी, बल्कि आम नागरिकों, वकीलों और न्यायपालिका से जुड़े अन्य पक्षों को भी सुविधा होगी।
यूनिफाइड डिजिटल प्लेटफॉर्म: यह कई लेवल के डेटा को एक सिस्टम में जोड़ता है, जिसमें डिस्ट्रिक्ट और तालुका कोर्ट भी शामिल हैं और केस रिकॉर्ड का पूरा व्यू देता है।
रियल-टाइम एक्सेस: यह सुप्रीम कोर्ट को निचली अदालतों से डिटेल्ड जानकारी एक्सेस करने में मदद करता है और हाई कोर्ट को भी उसी तरह एक्सेस देता है।
बेहतर एफिशिएंसी: वेरिफिकेशन को आसान बनाकर और डेटा रिट्रीवल को ऑटोमेट करके पेंडिंग केस (अभी लगभग 5.5 करोड़) में देरी कम करता है।
बढ़ी हुई ट्रांसपेरेंसी: यह लीगल सिस्टम में एक्यूरेसी को बेहतर बनाता है और केस मैनेजमेंट को आसान बनाता है।
सु सहायक यूजर्स को सुप्रीम कोर्ट से संबंधित प्रोसेस, जरूरी दिशा-निर्देशों, फाइलिंग सिस्टम, केस संबंधी जानकारी और अन्य सेवाओं तक सरल तरीके से पहुंचने में मदद करेगा। सीजेआई ने कहा कि इस टेक्नोलॉजी का उद्देश्य आम लोगों के लिए ज्यूडिशियल सर्विस को अधिक आसान और यूजर-फ्रेंडली बनाना है। एआई आधारित यह सिस्टम नागरिकों को वेबसाइट पर आवश्यक जानकारी ढूंढने में मदद करेगा और अदालत से संबंधित प्रक्रियाओं को समझने में सहायक होगा।
सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के अधिकारियों और बार सदस्यों की तारीफ करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इन परियोजनाओं को सफल बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका आने वाले समय में भी टेक्नोलॉजी आधारित सुधारों पर जोर देती रहेगी, ताकि आम नागरिकों को अधिक आसान और प्रभावी न्यायिक सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।