CM ममता के खिलाफ राज्यपाल के मानहानि केस में अब कल होगी सुनवाई, छेड़छाड़ का है मामला

आज कलकत्ता HC ने राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस द्वारा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ दायर मानहानि के मुकदमे की सुनवाई को आगामी गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी है। राज्यपाल बोस के वकील द्वारा दायर याचिका में आवश्यक बदलाव किए जाने के बाद मामले की सुनवाई कल होगी।
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कोलकाता: कलकत्ता हाई कोर्ट ने आज पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस द्वारा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ दायर मानहानि के मुकदमे की सुनवाई को आगामी  गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी है। राज्यपाल बोस ने CM बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के अन्य नेताओं की कथित टिप्पणियों को लेकर मुख्यमंत्री के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है।

अब राज्यपाल बोस के वकील द्वारा दायर याचिका में आवश्यक बदलाव किए जाने के बाद मामले की सुनवाई आगामी  गुरुवार को होगी। आज राज्यपाल  के वकील ने दावा किया कि राज्यपाल के खिलाफ निराधार आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने मानहानि के मुकदमे में प्रतिवादियों द्वारा भविष्य में दिए जाने वाले बयानों पर अंतरिम रोक लगाए जाने का भी अनुरोध किया।

वहीं न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने आज कहा कि मुकदमे में जिन प्रकाशनों का उल्लेख किया गया है, उन्हें इसमें पक्षकार नहीं बनाया गया है। बोस के वकील ने आवश्यक बदलावों को शामिल करते हुए नयी अर्जी दाखिल करने के लिए समय मांगा जिसके बाद अदालत ने अनुमति देते हुए कहा कि मामले की सुनवाई अब आगामी गुरुवार को होगी।

जानकारी दें कि राज्यपाल  बोस ने बीते 28 जून को बनर्जी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। इससे एक दिन पहले ही बनर्जी ने आरोप लगाया था कि महिलाओं ने उनसे शिकायत की थी कि राजभवन में होने वाली ‘‘गतिविधियों'' के कारण उन्हें वहां जाने में डर लगता है। राज्य सचिवालय में एक प्रशासनिक बैठक के दौरान 27 जून को बनर्जी ने दावा किया था कि ‘‘महिलाओं ने मुझे बताया है कि वे राजभवन में हाल में हुई घटनाओं के कारण वहां जाने से डरती हैं।''

वहीं बीते 11 मई को हावड़ा में एक रैली में  मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि राज्यपाल आनंद बोस के बारे में अभी तक सब कुछ सामने नहीं आया है। उन्होने  यह भी कहा था कि, अगर अब राजभवन बुलाया जाएगा तो मैं नहीं जाऊंगी। राज्यपाल अगर मुझसे बात करना चाहते हैं तो वह मुझे सड़क पर ही बुला सकते हैं। मैं उनसे वहीं मिलूंगी। उनके पास तो अब बैठना भी पाप है। इस पर राज्यपाल ने CM ममता की टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा था कि जनप्रतिनिधियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वह ‘गलत और बदनामी वाली धारणा’ न बनाएं।

गौरतलब है कि संविदा पर राजभवन में काम करने वाली एक महिला कर्मचारी ने दो मई को बोस के खिलाफ छेड़छाड़ का आरोप लगाया था जिसके बाद कोलकाता पुलिस ने जांच शुरू की थी। संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत, किसी राज्यपाल के विरुद्ध उसके कार्यकाल के दौरान कोई आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती।

(एजेंसी इनपुट के साथ) 

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