'हमारे विचार संकीर्ण और सीमित नहीं...बापू हमारे प्रेरणा', जी रामजी बिल पर संसद में बोले शिवराज सिंह

VB G Ram G Bill: लोकसभा में वीबी-जी राम जी बिल पर देर रात तक हुई चर्चा का ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जवाब दिया।
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शिवराज सिंह
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Shivraj Singh Chouhan in Parliament: संसद में जी राम जी बिल पर चर्चा शुरू हो गई है। चर्चा के दौरान विपक्ष ने इस विधेयक को लेकर आपत्तियां जताईं और इसे ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमिटी (जेपीसी) के पास भेजने की मांग की। कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि इतना महत्वपूर्ण और दूरगामी असर वाला बिल विस्तृत विचार-विमर्श की मांग करता है, इसलिए इसे ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमिटी को सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिना पर्याप्त बहस के इस बिल को पारित कराना चाहती है।

शिवराज सिंह चौहान दे रहे जवाब

मनरेगा का नाम बदलकर वीबी-जी राम जी किए जाने से जुड़े इस बिल पर लोकसभा में हुई बहस का जवाब ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिया। शिवराज ने बापू के अपमान के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि महात्मा गांधी हमारी आस्था और प्रेरणा हैं। उन्होंने विपक्ष के हंगामे पर कहा कि यह विकास से जुड़ा बिल है, फिर भी इसका विरोध किया जा रहा है। हम बापू के आदर्शों पर चलते हैं, लेकिन गांवों के विकास का विरोध हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ही बापू के आदर्शों की अनदेखी कर रहा है। हम किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं करते, हमारे लिए पूरा देश एक समान है और हमारे विचार संकीर्ण नहीं हैं।

हमारे विचार सीमित या संकीर्ण नहीं

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उन्होंने रात डेढ़ बजे तक इस बिल पर माननीय सदस्यों की बातें सुनी हैं और जवाब देना उनका अधिकार है। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अपनी बात रखकर जवाब न सुनना लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन है और संविधान की भावना के खिलाफ है। शिवराज ने इस पूरे हंगामे को गांव के विकास का विरोध करार दिया। उन्होंने दोहराया कि हम किसी राज्य के साथ भेदभाव नहीं करते। सारा देश हमारे लिए एक है और हमारे विचार सीमित या संकीर्ण नहीं हैं।

क्या बदलेगा पुराने कानून में?

मनरेगा यानी महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट 2005 दुनिया का सबसे बड़ा रोजगार गारंटी कार्यक्रम रहा है। इसका मकसद गांव के हर परिवार को साल में कम से कम 100 दिन काम की गारंटी देना था। अगर 15 दिन में काम नहीं मिले, तो बेरोजगारी भत्ता देने का नियम था। 2022-23 तक इसमें 15.4 करोड़ सक्रिय मजदूर थे। अब सरकार इसी ढांचे को बदलकर नया कानून ला रही है, जिसका दावा है कि यह संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करेगा और पुरानी कमियों को दूर करेगा।

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