PM मोदी (फाइल फोटो)
Vande Mataram Protocol: संसद के शीतकालीन सत्र में वंदे मातरम को लेकर हुई चर्चा ने संकेत दिए थे कि केंद्र सरकार इस मामले को गंभीरता से देख रही है। इसी क्रम में इस महीने की शुरुआत में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई, जिसमें राष्ट्रगान और वंदे मातरम के गानों को लेकर लागू प्रोटोकॉल और उनके सम्मान को बढ़ाने पर चर्चा हुई।
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखा गया वंदे मातरम स्वदेशी आंदोलन (1905-08) के दौरान प्रेरणादायक गीत के रूप में उभरा और स्वतंत्रता संग्राम से गहराई से जुड़ गया। हालांकि संविधान सभा ने इसे राष्ट्रगान के समान सम्मान दिया, लेकिन वर्तमान में राष्ट्रगान की तरह इसके गाने या सुनाने के लिए कोई अनिवार्य शिष्टाचार, शारीरिक मुद्रा या कानूनी आवश्यकता नहीं है।
केंद्र सरकार अब वंदे मातरम के सम्मान और प्रतिष्ठा को बढ़ाने पर विचार कर रही है। इस साल सरकार ने वंदे मातरम का एक साल तक चलने वाला उत्सव शुरू किया है। इसका पहला चरण नवंबर में पूरा हो चुका है, दूसरा चरण इसी महीने, तीसरा अगस्त 2026 में और चौथा नवंबर 2026 में आयोजित किया जाएगा।
खबरों के अनुसार, गृह मंत्रालय द्वारा बुलाई गई बैठक में अन्य मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने यह परखा कि क्या राष्ट्रगान और वंदे मातरम गाने की परिस्थितियों को स्पष्ट करने और अनादर के मामलों में दंड का प्रावधान करने के लिए नियम या निर्देश बनाए जाने चाहिए। हालांकि, इस पर अभी तक कोई आधिकारिक फैसला नहीं आया है।
राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को राष्ट्रगान जन गण मन की तरह संवैधानिक और वैधानिक सुरक्षा प्राप्त नहीं है। राष्ट्रगान के लिए संविधान के अनुच्छेद 51ए(ए) के तहत नागरिकों पर सम्मान करना मौलिक कर्तव्य है, और इसके उपयोग और गायन को गृह मंत्रालय के निर्देश नियंत्रित करता है।
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वंदे मातरम राजनीतिक और ऐतिहासिक बहसों का विषय बना हुआ है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस ने तुष्टीकरण की नीति के तहत गीत के कुछ छंद हटाए, जबकि कांग्रेस आरोप लगाती है कि भाजपा इतिहास तोड़-मरोड़ रही है और चुनावी रणनीति के तहत इस मुद्दे को उठाया जा रहा है।