

Uttarkashi Cloud Burst Video: उत्तरकाशी के धराली में खीर गंगा नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के चलते कई होटल और घर तबाह हो गए हैं। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में मंगलवार को बादल फटने से अचानक आई भयंकर बाढ़ ने ऐसा मंजर दिखाया कि जिसे देखकर कई भी सहम जाए। चंद सेकेंड में जो कुछ हुआ, वो केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं थी, एक ऐसा दृश्य था जिसे देखकर किसी का भी कलेजा कांप उठे। लोगों की घबराई हुई आंखें, मलबे में दबती चीखें, और वो पल जब किसी को समझ ही नहीं आया कि क्या हो रहा है कहां भागें और कैसे बचें।
इस बीच उत्तरकाशी घटना का एक ऐसा वीडियो भी सामने आया है जिसमें देखा जा सकता है कि कैसे लोग होटलों और गेस्ट हाउस से बदहवास हालत में भागते हुए दिख रहे हैं। जान बचाकर भागते लोगों पर कुछ ही पलों में तेज बहाव वाले पानी और मलबे की दीवार उन पर गिरती दिख रही है। वीडियो रिकॉर्ड करने वाला व्यक्ति भी चीखता हुआ सुनाई दे रहा है, जान बचाकर भागते लोगों को चेतावनी देता है, लेकिन तब तक कई लोग तेज बहाव में फंस जाते हैं।
उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि 10 से 12 लोग मलबे में दबे हो सकते हैं। डीएम ने कहा कि नेटवर्क ठप होने की वजह से स्पष्ट जानकारी मिलने में परेशानी हो रही है। हर्षिल से आर्मी की टीम, ITBP की दो टीमें, तथा SDRF और NDRF के जवान तत्काल मौके पर पहुंचकर राहत-बचाव कार्यों में जुटे हैं। एनडीआरएफ की तीन और टीम मनैरा, बड़कोट और देहरादून से उत्तरकाशी के लिए रवाना की गई हैं।
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटपार्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि धराली (उत्तरकाशी) क्षेत्र में बादल फटने से हुए भारी नुकसान का समाचार अत्यंत दुःखद एवं पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि राहत एवं बचाव कार्यों के लिए SDRF, NDRF, जिला प्रशासन तथा अन्य संबंधित टीमें युद्ध स्तर पर जुटी हुई हैं। इस सम्बन्ध में लगातार वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क में हूं और स्थिति की गहन निगरानी की जा रही है। ईश्वर से सभी के सकुशल होने की प्रार्थना करता हूं।
इसको लेकर उत्तरकाशी पुलिस का भी बयान सामने आया है। पुलिस का कहना है कि, उत्तरकाशी, हर्षिल क्षेत्र में खीर गाड़ का जलस्तर बढने से धराली में नुकसान होने की सूचना पर पुलिस, SDRF, आर्मी आदि आपदा दल मौके पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं। उक्त घटना को देखते हुए सभी नदी से उचित दूरी बनायें। स्वयं, बच्चों व मवेशियों को नदी से उचित दूरी पर ले जायें।