पहलगाम हमले पर भड़के उदित राज, कहा- ‘मोदी जी ने कहा था, लाहौर जाएंगे और एक सिर के बदले दस लाएंगे, अब निभाएं अपना वादा’
देश की सुरक्षा अब केवल सीमा पर नहीं, सियासी गलियारों में भी गंभीर बहस का मुद्दा बन चुकी है। उदित राज के बयानों से यह साफ है कि अब विपक्ष के नेता पुराने वादों की याद दिला रहे हैं।
- Written By: विकास कुमार उपाध्याय
उदित राज, कांग्रेस, फोटो - सोशल मीडिया
नई दिल्ली : जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद सियासत गर्मा गई है। कांग्रेस नेता डॉ उदित राज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके पुराने वादे याद दिलाते हुए आक्रामक तेवर अपनाए हैं। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने वादा किया था कि पाकिस्तान में घुसकर कार्रवाई करेंगे और एक सिर के बदले दस लाएंगे, अब वक्त आ गया है कि वे अपने उन वादों को निभाएं।
उदित राज ने न्यूज एजेंसी एएनाई से बात करते हुए सवाल उठाया, “पीएम मोदी ने खुद कहा था कि हम लाहौर में घुसेंगे और एक के बदले में दस सिर लाएंगे। आज जब हमारे 26 निर्दोष नागरिक आतंकियों का शिकार हुए हैं, तो क्या वह वादा अब सिर्फ भाषण बनकर रह गया है?”
उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी तीखा सवाल करते हुए कहा, “आपको कौन रोक रहा है? अगर कार्रवाई करनी है तो कीजिए, कांग्रेस और पूरा विपक्ष सरकार के साथ खड़ा है। देश की सुरक्षा और आतंकवाद पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए।”
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आतंकियों को नहीं बख्शा जाएगा- केंद्र सरकार
22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में कुल 26 पर्यटकों की जान गई, जिससे पूरे देश में आक्रोश फैल गया। सरकार ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि करारा जवाब दिया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय ने मिलकर निर्णय लिया है कि सशस्त्र बलों को पूरी छूट दी गई है, वो कैसे, कब और कहां से जवाब देंगे, इसका निर्णय अब सेना के हाथ में है।
विपक्ष भी है साथ
हमले के बाद केंद्र सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, जिसमें सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने आतंकवाद के खिलाफ सरकार को पूरा समर्थन देने की बात कही थी। विपक्षी दलों ने एक सुर में कहा था कि आतंकी हमले पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और जो भी ठोस कदम उठाया जाएगा, वो उनके साथ हैं।
भारत का पाकिस्तान पर दबाव, जल संधि स्थगित
इस हमले के बाद भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए इंडस वॉटर ट्रीटी (1960 की जल संधि) को स्थगित कर दिया है, जो पाकिस्तान के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। इसके अलावा, पाकिस्तानी जहाजों और पोतों के भारत में प्रवेश पर रोक, डाक सेवाएं बंद करना और व्यापारिक मार्गों को पूरी तरह सील कर देना जैसे कई निर्णय लिए गए हैं।
