असदुद्दीन ओवैसी (इमेज-सोशल मीडिया)
Asaduddin owaisi News: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने अमेरिकी व्यापार समझौते की कड़ी आलोचना करते हुए इसे भारत की संप्रभुता का अपमान बताया। ओवैसी अमेरिका के उस कार्यकारी आदेश पर प्रतिक्रिया दे रहे थे, जिसमें रूस से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तेल खरीदने पर भारत के आयात पर 25% शुल्क लगाने का प्रावधान है।
लोकसभा में बोलते हुए ओवैसी ने कहा, “US ट्रेड डील की बात करें तो, ट्रंप ने आदेश निकाला कि अगर हम रूस का तेल खरीदते हैं, तो 25% टैरिफ लगाया जाएगा। यह ‘गोरी चमड़ी वाला’ कौन है जो हमें हुक्म दे रहा है? क्या देश को इसके लिए आज़ादी मिली थी? हम जिससे चाहेंगे तेल खरीदेंगे। आप कौन होते हैं हमें बताने वाले? यह दुख की बात है कि हमारी सरकार चुप है। हमारे आत्मसम्मान का क्या होगा?”
ओवैसी ने यूरोपीय संघ के साथ भारत के व्यापार समझौतों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह समझौता देश के औद्योगिक उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। “यूरोपीय संघ संधि के साथ हमारा पीएलआई (उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन) प्रभावित होगा, क्योंकि आपने चिकित्सा उपकरणों और उन्नत मशीनरी पर शुल्क कम कर दिए हैं। अमेरिकी औद्योगिक सामान आयात होंगे। देश में औद्योगीकरण में गिरावट का खतरा है। क्या हम मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर रहे हैं या जबरन खरीद आदेश पर?”
ओवैसी ने कपड़ा क्षेत्र पर भी प्रभाव की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने बांग्लादेश को शून्य शुल्क पर भारत से कपास खरीदने को कहा है। “भिवंडी, मालेगांव और बनारस के पावरलूमों का क्या होगा? हम बांग्लादेश को 70% कच्चा कपास आपूर्ति करते हैं।”
यह भी पढ़ें- आज देशभर में किसानों का चक्का जाम, बैंक से लेकर स्कूल-कॉलेज तक…क्या खुलेगा-क्या रहेगा बंद?
इससे पहले, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि भारत ने रूसी तेल की खरीद रोकने की प्रतिबद्धता जताई है और इसके बजाय अमेरिकी तेल या संभवतः वेनेजुएला से तेल खरीदने पर विचार कर रहा है। लीविट ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई बातचीत में नई दिल्ली ने न केवल रूस से तेल की खरीद बंद करने पर सहमति जताई, बल्कि अमेरिकी ऊर्जा आयात बढ़ाने पर भी सहमति दी। उन्होंने इसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए लाभदायक कदम बताया।