AIADMK में बागियों पर गिरेगी गाज! महासचिव पलानीस्वामी ने खींची ‘लक्ष्मण रेखा’, वापस नहीं होंगे छीने गए पद
AIADMK Internal Crisis: तमिलनाडु की राजनीति में सियासी हलचल तेज हो गई है। विधानसभा चुनाव में विश्वास मत के दौरान TVK का साथ देने वाले AIADMK के नेताओं को अब बड़े परिणाम भुगतने पड़ सकते है।
- Written By: प्रिया जैस
एडप्पादी के. पलानीस्वामी (सौजन्य-IANS)
AIADMK Edappadi K Palaniswami EPS: तमिलनाडु में टीवीके का समर्थन करने के बाद AIADMK ने सख्त रूप अपना लिया है। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने संकेत दिए है कि AIADMK के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी बागी विधायकों और नेताओं को संगठनात्मक पदों पर बहाल करने के पक्ष में नहीं हैं। खासकर वे पद जो उन्होंने विधानसभा विश्वास मत के दौरान सत्तारूढ़ टीवीके सरकार का समर्थन करने के बाद खो दिए थे।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन और पार्टी के अलग-अलग स्तरों पर नेताओं के बागी होने के बाद AIADMK फिर से एक होने की कोशिश कर रही है। के. पलानीस्वामी भी संगठन पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने और विरोध को उभरने से रोकने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।
तीसरे स्थान पर खिसकी AIADMK
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों कि माने तो चुनावी हार और विधानसभा में पार्टी के तीसरे स्थान पर खिसकने के कारण कई नेताओं और कार्यकर्ता परेशानी में पड़ गए है। नेताओं को अब अपने राजनीतिक करियक को लेकर सोच-विचार करना पड़ रहा है। इन चुनौतियों के बावजूद पलानीस्वामी ने आत्मविश्वास दिखाया है और संगठन के भीतर अपना अधिकार मजबूत करने की कोशिश की है।
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हाल के हफ्तों में, AIADMK प्रमुख ने बागी गुट से जुड़े कई नेताओं के साथ सुलह करने के लिए कदम उठाए हैं। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि उन्होंने अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत छीने गए संगठनात्मक पदों को वापस देने के मामले में एक स्पष्ट “लक्ष्मण रेखा” (सीमा) तय कर दी है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि ऐसे नेताओं को फिर से पद देने से पार्टी का आंतरिक अनुशासन बिगड़ सकता है और पार्टी के भीतर सत्ता के कई केंद्र बन सकते हैं।
इन बातों का खास ध्यान रख रहे पलानीस्वामी
पार्टी सूत्रों के अनुसार, पलानीस्वामी इस बात का भी ध्यान रख रहे हैं कि ऐसे कदम से जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच क्या संदेश जाएगा। जिन पदाधिकारियों ने खुलकर पार्टी नेतृत्व को चुनौती दी थी, उन्हें फिर से पद देने को अनुशासनहीनता को बढ़ावा देने के तौर पर देखा जा सकता है और इससे महासचिव का अधिकार कमजोर हो सकता है।
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फिलहाल, पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि ऐसे संकेत कम ही हैं कि हटाए गए नेताओं को उनकी पुरानी संगठनात्मक भूमिकाएं वापस मिलेंगी। पूर्व मंत्री एस.पी. वेलुमणि को मुख्यालय सचिव के पद से हटा दिया गया था, जबकि सी.वी. शनमुगम से आयोजन सचिव और विल्लुपुरम ज़िला सचिव के पद छीन लिए गए थे।
हालांकि ज्यादातर बागी नेताओं को सुलह की प्रक्रिया में शामिल कर लिया गया है, लेकिन शनमुगम नेतृत्व की इन कोशिशों से काफी हद तक अलग-थलग ही हैं। गौरतलब है कि AIADMK तमिलनाडु के हालिया विधानसभा चुनाव में सिर्फ 47 सीटें ही जीत पाई। इसके कारण मुख्य विपक्षी पार्टी के तौर पर उसकी लंबे समय से चली आ रही स्थिति भी छिन गई।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
