

Supreme Court on Dowry Case: सर्वोच्च न्यायालय ने दहेज उत्पीढ़न केस में बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि समाज में दुल्हन का अपमान होना बंद होना चाहिए। कोर्ट ने ने कहा लड़के शादी क्यों करते हैं और फिर परिवार और लड़की का अपमान करते हैं? बता दें कि जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच छत्तीसगढ़ के उस मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें शादी के तीन साल के अंदर एक महिला ने अपने ससुराल में फांसी लगाकर जान दे दी थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि पति और उसके परिवार की तरफ से लगातार दहेज की मांग और मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा था।
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने बताया कि लड़के शादी क्यों करते हैं और फिर लड़की और उसके परिवार का अपमान क्यों करते हैं? कोर्ट ने कहा कि एक संदेश जाना चाहिए कि वो दुल्हन और उसके परिवार का अपमान जारी नहीं रख सकते। अदालत ने कहा कि दहेज के नाम पर लड़की और उसके परिवार पर आर्थिक दबाव बनाया जाता है। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने टिप्पणी में कहा कि उनकी कोशिश यही रहती है कि दुल्हन और उसके परिवार को निचोड़ लिया जाए। रिकॉर्ड में मौजूद आरोपों का जिक्र करते हुए जस्टिस ने कहा कि लड़की के परिवार को “भिखारी” कहा गया, जबकि वे लोग अपनी बेटी को बचाने की कोशिश कर रहे थे।
बता दें कि इस मामले में ट्रायल कोर्ट और बाद में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पति के परिवार के कई सदस्यों को IPC की धारा 304B (दहेज मृत्यु), 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 498A (क्रूरता और प्रताड़ना) के तहत दोषी पाया था और सजा सुनोई थी।
पति के छोटे भाई ने सुप्रीम कोर्ट में केवल धारा 498A के तहत अपनी सजा को चुनौती दी थी, लेकिन अदालत ने राहत देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस नागरत्ना ने मामले पर कहा कि आपको खुश होना चाहिए कि केवल 498A लगी है और केवल तीन साल की सजा है।
सुप्रीम कोर्ट ने FIR दर्ज होने में देरी की दलील भी खारिज कर दी है। साथ ही कोर्ट ने कहा संदेश जाना चाहिए कि दुल्हनों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है। न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां ने भी टिप्पणी की कि यह पढ़े-लिखे लोग हैं। अंत में सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए निचली अदालतों के फैसले को बरकरार रखा।