UAPA मामलों में अब नहीं होगी देरी...SC ने दिया सख्त आदेश, कहा- एक साल के भीतर पूरी होनी चाहिए सुनवाई

NIA Pending Cases: सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक निर्देश देते हुए UAPA के सभी लंबित मामलों को एक साल के भीतर निपटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने राज्यों से विशेष अदालतों और समर्पित वकीलों की मांग की है।
Supreme Court on UAPA Pending Cases
UAPA के लंबित मामलों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Supreme Court on UAPA Pending Cases: सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता के तहत आतंकवाद और सुरक्षा से जुड़े   (UAPA) लंबित मामलों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा जांच किए जा रहे सभी मामले एक वर्ष के भीतर पूरी तरह से निपटाए जाने चाहिए। लंबित मामलों और आरोपी को लंबे समय तक जमानत न मिलने की समस्या को देखते हुए अदालत ने राज्यों से अतिरिक्त विशेष अदालतों की स्थापना करने को कहा है।

मंगलवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने केंद्र और राज्यों सरकारों को निर्देश दिए कि इन विशेष अदालतों के लिए समर्पित लोक अभियोजक नियुक्त किए जाएं, ताकि मामलों की रोजाना सुनवाई हो और ट्रायल में तेजी लाई जा सके।

बेंच ने राज्यों से मांगा जबाव

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने राज्यों से 4 सप्ताह में जवाब मांगा कि NIA मामलों के निपटारे के लिए कितनी विशेष अदालतों की आवश्यकता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रत्येक मामले की सुनवाई एक साल के भीतर पूरी होनी चाहिए। हाई कोर्ट को निर्देश दिया गया कि वे इन विशेष अदालतों में पर्याप्त कर्मचारियों की व्यवस्था सुनिश्चित करें। जहां पर्याप्त लोक अभियोजक नहीं हैं, वहां विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने की अधिसूचना जारी की जानी चाहिए। सरकार ने कोर्ट को बताया कि कुछ मामलों में हाई कोर्ट की राय आवश्यक है। रजिस्ट्रार जनरल अगली सुनवाई में इस पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।

वहीं, केंद्र सरकार की ओर से बोलते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि गृह मंत्रालय ने राज्यों को लिखा है कि सुरक्षा कारणों से नए न्यायालय परिसर का निर्माण जरूरी नहीं, बल्कि मौजूदा न्यायालयों में विशेष अदालतें आरक्षित करके NIA मामलों की सुनवाई की जा सकती है।

दिल्ली में सबसे ज्यादा मामले लंबित

देश में सबसे ज्यादा NIA मामले दिल्ली (59) में लंबित हैं, इसके बाद जम्मू-कश्मीर (38) और असम, केरल व गुजरात (33-33) में। अदालत ने जोर दिया कि त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए सुनवाई समयबद्ध तरीके से पूरी होना अनिवार्य है। इस दिशा में सुप्रीम कोर्ट का संदेश स्पष्ट है: UAPA मामलों के निपटान में तेजी लाना और न्याय प्रक्रिया में देरी को रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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