

Supreme Court inquiry Committee: कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा जंतर-मंतर पर आयोजित विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग और पुलिसकर्मियों के खिलाफ हुई हिंसा के मामलों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया है।
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और न्यायाधीश वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट किया कि इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज, किसी हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस और एक वरिष्ठ रिटायर्ड पुलिस अधिकारी शामिल होंगे।
इस उच्चस्तरीय पैनल को मामले के तथ्य जुटाने का काम सौंपा जाएगा और इसे समय-समय पर अपनी रिपोर्ट देनी होगी, जिसके आधार पर न्यायालय आवश्यक निर्देश जारी करेगा। अदालत बुधवार को अंतिम आदेश पारित कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम समिति को सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं प्रदान करेंगे।
हमें पूरा विश्वास है कि समिति के पास पहुंचने वाले किसी भी पीड़ित को तुरंत सुनवाई का मौका मिलेगा। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों हुई हर सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली पुलिस से स्पष्ट रिपोर्ट मांगी थी। उनकी रिपोर्ट से असंतुष्ट सुप्रीम कोर्ट ने अब अपनी कमेटी का गठन करने का फैसला किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि समिति महिला प्रदर्शनकारियों के साथ यौन उत्पीड़न, ऑनलाइन उत्पीड़न (साइबर बुलिंग) और सोशल मीडिया के जरिये संवेदनशील/कमजोर वर्ग के लोगों को निशाना बनाए जाने के आरोपों की भी जांच करेगी।
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, "जो भी जिम्मेदार हो, इसके लिए बहाने कोई या औचित्य नहीं हो सकता। इसे पूरी गंभीरता से लिया जाना चाहिए और इसके अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचाया जाना चाहिए। इसीलिए हम इस उच्चस्तरीय समिति का गठन कर रहे हैं, जो इन मामलों के हर पहलू की जांच करेगी।"
20 जुलाई को छात्रों के 'संसद चलो' मार्च के दौरान पुलिस पर लगाए गए अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों को दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में खारिज कर दिया। पुलिस ने जवाबी हलफनामे में कहा है कि प्रदर्शन के दौरान करीब 30 हजार से अधिक लोग लगभग 3 किमी के इलाके में मौजूद थे और उन्हें नियंत्रित करने के लिए करीब 5 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। स्थिति बिगड़ने के बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए चरणबद्ध यानी' ग्रेडेड' तरीके से बल का इस्तेमाल किया गया।
बिहार के सीवान जिले में प्रदर्शन का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में बिहार पुलिस ने खुलासा किया है कि प्रदर्शनकारियों के पथराव के बीच भीड़ में फंसे डीआईयू के एक कॉन्स्टेबल ने अपनी एके-47 से हवा में चार राउंड फायर किया था। पुलिस ने साफ किया है कि इन गोलियों से कोई घायल नहीं हुआ।