स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के शिल्पकार राम सुतार का निधन, 100 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

Artist Ram Sutar passes away: स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माता और पद्म पुरस्कार से सम्मानित मूर्तिकार राम सुतार का निधन। 100 वर्षीय कलाकार ने नोएडा में अंतिम सांस ली।
Artist Ram Sutar passes away: स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माता और पद्म पुरस्कार से सम्मानित मूर्तिकार राम सुतार का निधन। 100 वर्षीय कलाकार ने नोएडा में अंतिम सांस ली।
शिल्पकार राम सुतार का निधन (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Statue of Unity Artist Ram Sutar passes away: स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माण से दुनिया भर में पहचान बनाने वाले देश के प्रख्यात मूर्तिकार राम सुतार का 100 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने हाल ही में शताब्दी वर्ष पूरा किया था। उनके पुत्र अनिल सुतार ने जानकारी दी कि राम सुतार का निधन 17 दिसंबर की आधी रात को नोएडा स्थित उनके आवास पर हुआ।

अनिल सुतार के अनुसार, अंतिम संस्कार 18 दिसंबर को सुबह 11 बजे किया जाएगा। अंतिम यात्रा सेक्टर 19, ए-2, नोएडा से शुरू होकर सेक्टर 94 स्थित अंतिम निवास तक जाएगी।

जन्म और करियर

राम सुतार का जन्म 19 फरवरी 1925 को गुजरात के गोधरा में हुआ था। वह वर्ष 1959 में अपने गृह राज्य महाराष्ट्र से दिल्ली आ बसे, जिसके बाद उन्होंने देश और विदेश में अनेक ऐतिहासिक मूर्तियां बनाईं। पत्थर और धातु पर अद्भुत शिल्पकारी के लिए वह विश्व स्तर पर सम्मानित रहे।

उनकी प्रमुख रचनाएं

  • स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (182 मीटर): सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित यह विश्व की सबसे ऊंची मूर्ति है।
  • महात्मा गांधी की प्रतिमाएं: उन्होंने गांधीजी की लगभग 350 मूर्तियां तैयार कीं, जो कई देशों में स्थापित हैं।
  • डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमाएं: मुंबई की चैत्यभूमि सहित कई स्थानों पर उनकी कृतियां स्थापित हैं।
  • भगवान शिव की प्रतिमा (153 फीट), बेंगलुरु: उनकी अत्यधिक चर्चित और दर्शनीय मूर्तियों में से एक।
  • छत्रपति संभाजी महाराज की प्रतिमा (मोशी, पुणे): 100 फीट ऊंची यह प्रतिमा भी उनकी उल्लेखनीय कृतियों में शामिल है।

सम्मान

राम सुतार को उनकी कला के लिए देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान वर्ग के पुरस्कार प्राप्त हुए। उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण, टैगोर पुरस्कार और महाराष्ट्र भूषण से सम्मानित किया गया। उनके निधन से भारतीय कला जगत में शोक की लहर फैल गई है। उन्हें देश की सांस्कृतिक धरोहर में अमूल्य योगदान के लिए हमेशा याद किया जाएगा।

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