‘हिंदी’ पर स्टालिन का अजीब बयान, बोले UP-बिहार कभी नहीं थे हिंदी क्षेत्र, BJP का पलटवार- मूर्खतापूर्ण बातों का कोई जवाब नहीं
स्टालिन ने आज तीन-भाषा नीति का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि अखंड हिंदी पहचान के दबाव ने प्राचीन मातृभाषाओं को मार दिया है और भोजपुरी, अवधी, ब्रज और गढ़वाली सहित कई भारतीय भाषाओं को “निगल” लिया है।
- Written By: राहुल गोस्वामी
'हिंदी' पर स्टालिन का अजीब बयान
नई दिल्ली : तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने आज यानी गुरुवार को तमिलनाडु में तीन-भाषा नीति का कड़ा विरोध करते हुए एक अजीबो-गरीब बयान में कहा कि अखंड हिंदी पहचान के दबाव ने प्राचीन मातृभाषाओं को मार दिया है। इस बाबत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर CM स्टालिन ने लिखा कि हिंदी ने भोजपुरी, अवधी, ब्रज और गढ़वाली सहित कई भारतीय भाषाओं को “निगल” लिया है, जो अब जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित एक पत्र में उन्होंने कहा, ‘‘हम हिंदी थोपने का विरोध करेंगे। हिंदी मुखौटा है, संस्कृत छिपा हुआ चेहरा है।” सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने आरोप लगाया है कि केंद्र राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) में तीन-भाषा फार्मूले के माध्यम से हिंदी को थोपने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, केंद्र सरकार ने इस आरोप का खंडन किया है। वहीं इस मुद्दे पर बीजेपी ने स्टालिन के बयान को ही मूर्खतापूर्ण बताया।
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वहीं इस पत्र में स्टालिन ने दावा किया कि बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में बोली जाने वाली मैथिली, ब्रजभाषा, बुंदेलखंडी और अवधी जैसी कई उत्तर भारतीय भाषाओं को ‘‘आधिपत्यवादी हिंदी ने नष्ट कर दिया है।”
उन्होंने दावा किया कि भाजपा शासित राजस्थान उर्दू प्रशिक्षकों के बजाय संस्कृत शिक्षकों की नियुक्ति कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘अगर तमिलनाडु त्रिभाषा नीति को स्वीकार करता है, तो मातृभाषा को नजरअंदाज कर दिया जाएगा और भविष्य में संस्कृतीकरण होगा।” उन्होंने दावा किया कि एनईपी प्रावधानों में कहा गया है कि ‘‘संस्कृत के अलावा” अन्य भारतीय भाषाओं को स्कूलों में पढ़ाया जाएगा और तमिल जैसी अन्य भाषाओं को ऑनलाइन पढ़ाया जा सकता है।
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मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ‘‘इससे यह स्पष्ट होता है कि केंद्र ने तमिल जैसी भाषाओं को खत्म करने और संस्कृत को थोपने की योजना बनाई है।” स्टालिन ने कहा कि द्रविड़ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सीएन अन्नादुरई ने दशकों पहले राज्य में द्विभाषा नीति लागू की थी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ‘‘हिंदी-संस्कृत के माध्यम से आर्य संस्कृति को थोपने और तमिल संस्कृति को नष्ट करने के लिए कोई जगह नहीं है।”
जानकारी दें कि, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एवं सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने बीते बुधवार को ही कहा था कि, अगर तमिलनाडु और तमिलों के आत्मसम्मान के साथ खिलवाड़ कर जबरन उन पर हिंदी भाषा ‘थोपी’ नहीं जाए तो पार्टी इस भाषा का विरोध नहीं करेगी।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
