लद्दाख में प्रदर्शन (सोर्स- सोशल मीडिया)
Ladakh Protest: लद्दाख में चल रहा आंदोलन एक बार फिर ज़ोर पकड़ गया है। एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की रिहाई के ठीक दो दिन बाद सोमवार को लेह और कारगिल शहरों में बड़ी रैलियां निकाली गईं। ये प्रदर्शन लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के आह्वान पर आयोजित किए गए थे।
इनका मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार से अपील करना था कि वह लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची को लागू करने की लंबित मांगों पर तत्काल बातचीत शुरू करे। यह आंदोलन पिछले पांच सालों से इन दोनों संगठनों के नेतृत्व में चल रहा है। कारगिल और पड़ोसी द्रास क्षेत्र में पूरी तरह से बंद रहा, जबकि पूरे केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी।
यह रैली सितंबर में हुई हिंसक घटनाओं के बाद LAB द्वारा आयोजित पहली बड़ी सार्वजनिक सभा थी। उन घटनाओं के बाद प्रशासन ने पुलिस कार्रवाई करते हुए कड़ा रुख अपना लिया था। सोनम वांगचुक को एनएसए यानी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत लगभग छह महीने तक हिरासत में रखा गया था।
#WATCH | Kargil, Ladakh: Leh Apex Body and Kargil Democratic Alliance organised a protest today regarding their four-point agenda, including restoration of statehood, inclusion under the Sixth Schedule, jobs and cultural security pic.twitter.com/fZcYlqk8NP — ANI (@ANI) March 16, 2026
केंद्र सरकार ने शनिवार को उनकी हिरासत खत्म करने की घोषणा की इस कदम को सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक बातचीत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया कदम बताया गया। वांगचुक की रिहाई से पहले ही LAB और KDA ने बातचीत के अगले दौर पर ज़ोर देने के लिए प्रदर्शन की घोषणा कर दी थी। फरवरी में उच्च-स्तरीय समिति की एक बैठक के दौरान, दोनों संगठनों ने वांगचुक सहित 70 हिरासत में लिए गए लोगों की बिना शर्त रिहाई की मांग की थी।
लेह में रैली सिंगे नामग्याल चौक से शुरू हुई, जिसका नेतृत्व LAB के सह-अध्यक्ष चेरिंग दोरजे ने किया। प्रदर्शनकारी लेह पोलो ग्राउंड तक मार्च करते हुए गए, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची को लागू करने की अपनी मांगों के समर्थन में ज़ोरदार नारे लगाए।
कुछ प्रदर्शनकारी उन चार लोगों की तस्वीरें भी अपने साथ लिए हुए थे, जिनकी पिछले साल सितंबर में हुई हिंसा के दौरान मौत हो गई थी। कारगिल में भी इसी तरह की एक रैली आयोजित की गई, जहां KDA के सह-अध्यक्ष असगर अली करबलाई, सांसद हनीफा जान और एक्टिविस्ट सज्जाद कारगिली ने सभा को संबोधित किया।
उन्होंने राज्य का दर्जा देने, छठी अनुसूची में शामिल करने, हिरासत में लिए गए दो एक्टिविस्टों की रिहाई और पिछले साल की घटनाओं से जुड़े मामलों को वापस लेने की मांगों को फिर से दोहराया। पत्रकारों से बात करते हुए चेरिंग दोरजे ने सड़कों पर लगी बैरिकेडिंग और प्रशासनिक पाबंदियों के बावजूद बड़ी संख्या में बाहर निकलने के लिए लोगों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है, और यह रैली इस आंदोलन की व्यापक लोकप्रियता का एक प्रमाण है।
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उन्होंने जोर देकर कहा कि जनता LAB और KDA के साथ मजबूती से खड़ी है, जिससे आंदोलन के आलोचकों के दावों का खंडन होता है। जहां एक ओर वांगचुक की रिहाई को बातचीत की दिशा में एक सकारात्मक कदम के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारी अपनी मुख्य मांगों पर अडिग हैं।