

Education Ministry Controversies Explained: 2014 से लेकर अब तक यानी की 12 साल के एनडीए सरकार की कार्यकाल में कुल चार शिक्षा मंत्री बनाए गए। हालांकि, इमसें से तीन शिक्षा मंत्री तो अपने कार्यकाल के तीन साल भी पूर नहीं कर पाए। इनमें सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान ही ऐसे शिक्षा मंत्री रहे जो पांच साल तक के लिए इस पद पर बने रहे। नीट पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों के प्रदर्शन के बीच शनिवार को उन्होंने भी शिक्षा मंत्री के पद से अपना इस्तीफा दे दिया गया। सरकार ने शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार अब प्रह्लाद जोशी को सौंपी है।
धर्मेंद्र प्रधान से पहले एनडीए सरकार में जितने में शिक्षा मंत्री रहे, उनका कार्यकाल बहुत कम रहा। स्मृति ईरानी सिर्फ दो साल तक ही इस पद पर रहीं। प्रकाश जावडेकर भी केवल 2 साल 10 महीने के लिए शिक्षा मंत्री रहे। इसके बाद रमेश पोखरियाल निशंक का कार्यकाल भी करीब 2 साल तक के लिए रहा।
2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी एनडीए सरकार में स्मृति ईरानी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। 26 मई, 2014 से 5 जुलाई 2016 तक वे शिक्षा मंत्री रहीं। उस समय शिक्षा मंत्रालय को मानव संसाधन विकास मंत्रालय के नाम से जाना जाता था। बतौर शिक्षा मंत्री के रूप में स्मृति ईरानी को भी काफी विरोध और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। उनके कार्यकाल के दौरान ही जएनयू में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए और जेएनयू छात्रसंघ के तत्कालीन अध्यक्ष कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी भी हुई। इस घटना के बाद विपक्ष ने स्मृति ईरानी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
जनवरी, 2016 में रोहित वेमुला की आत्महत्या को लेकर भी तत्कालीन शिक्षा मंत्री पर सवाल उठे, जिसके बाद जुलाई 2026 में स्मृति ईरानी को शिक्षा मंत्रालय का पद छोड़ना पड़ा। हालांकि, सरकार ने उन्हें टेक्सटाइल मीनिस्टरी की जिम्मेदारी सौंप दी।
स्मृति ईरानी के बाद नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने प्रकाश जावड़ेकर को शिक्षा मंत्री बनाया। वह 5 जुलाई, 2016 से 30 मई, 2019 तक इस पद पर रहे। उनके इंडियन इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट एक्ट 2017 लाए और इससे आईआईएम को ज्यादा स्वायत्तता मिली। जावड़ेकर के शिक्षा मंत्री रहते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की शुरुआत हुई। इस संस्था को स्थापित करने के पीछे सरकार मकसद था कि राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली एंट्रेंस एग्जाम का संचालन एक ही संस्था के पास हो। NEET पेपर लीक के बाद एनटीए को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।
2018 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय को तब विरोध का सामना करना पड़ा जब सीबीएसई बोर्ड का पेपर लीक हो गया। इसके अलावा जिओ इंस्टिट्यूट को भारत के छह Institutions of Eminence का दर्जा देने का भी विरोध हुआ। इसके बाद 2019 में उन्हें शिक्षा मंत्री के पद से हटना पड़ा।
2019 में प्रकाश जावड़ेकर की जगह एनडीए की नई सरकार में उत्तराखंड से आने वाले रमेश पोखरियाल निशंक को शिक्षा मंत्री बनाया गया। पोखरियाल के कार्यकाल में सबसे बड़ी उपलब्धि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की घोषणा करने की थी। हालांकि इसका अधिकतर काम जावड़ेकर के कार्यकाल में पूरा हो चुका था। एनईपी को जुलाई, 2020 में मंजूरी दी गई। रमेश पोखरियाल 'निशंक' के शिक्षा मंत्री रहने के दौरान देश के कई प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में प्रशासनिक नियुक्तियां अटकी रहीं।
जेएनयू, बीएचयू, दिल्ली विश्वविद्यालय और हैदराबाद विश्वविद्यालय जैसे केंद्रीय विश्वविद्यालयों में महीनों तक कुलपतियों के पद खाली रहे। इसके अलावा, पटना, भुवनेश्वर, दिल्ली, इंदौर और मंडी समेत पांच प्रमुख आईआईटी संस्थानों में भी लंबे समय तक पूर्णकालिक निदेशकों की नियुक्ति नहीं हो सकी थी।
मई 2021 में पोखरियाल कोरोना संक्रमित हो गए, जिसके बाद उन्हें लगभग एक महीने तक एम्स में भर्ती रहना पड़ा। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते 7 जुलाई 2021 को उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान को देश का नया शिक्षा मंत्री बनाया गया।