पत्नी साधना को ही भूल गए शिवराज सिंह, याद आई तो काफिले के साथ लिया यू-टर्न
Shivraj Singh Chauhan: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान शनिवार को जूनागढ़ में एक रोचक जल्दबाज़ी का शिकार हो गए। वे अपनी पत्नी साधना सिंह को पीछे छोड़कर 22 गाड़ियों के काफिले के साथ आगे आ गए थे।
- Written By: अर्पित शुक्ला
पत्नी साधना के साथ शिवराज सिंह (Image- Social Media)
Shivraj Singh Chauhan: केंद्र सरकार में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान शनिवार को गुरडरात के जूनागढ़ में एक रोचक जल्दबाजी का शिकार हो गए। बीजेपी नेता अपनी पत्नी साधना सिंह को पीछे छोड़कर 22 गाड़ियों के काफिले के साथ राजकोट की तरफ रवाना हो गए। लगभग एक किलोमीटर का सफर तय करने के बाद उनको अचानक एहसास हुआ कि पत्नी तो साथ में हैं ही नहीं। इसके तुरंत बाद उन्होंने काफिला यू-टर्न लेकर मूंगफली शोध केंद्र वापस लौटे, जहां साधना सिंह प्रतीक्षालय में इंतज़ार कर रही थीं।
गुजरात दौरे पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान
असल में, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी पत्नी के साथ गुजरात के धार्मिक तथा शासकीय दौरे पर थे। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन और गिर के जंगल में शेरों को देखने के बाद शिवराज सिंह का शनिवार को मूंगफली शोध केंद्र में कार्यक्रम था, यहां पर उन्होंने किसानों और ‘लखपति दीदी’ योजना से जुड़ी महिलाओं से बात की।
बता दें कि शिवराज सिंह चौहान की रात 8 बजे राजकोट से फ्लाइट थी और रास्ते की हालत ठीक नहीं थी, इसलिए वो जल्दी में रवाना हो गए।
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जल्दबाजी में थे शिवराज सिंह
मूंगफली शोध केंद्र में कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान हर थोड़ी देर में बार-बार मंच से घड़ी पर नजर डालते रहे। माइक पर उन्होंने खुद ही कहा कि राजकोट का रास्ता ठीक नहीं है, अगली बार फुर्सत से आऊंगा। शिवराज सिंह ने भाषण संक्षिप्त किया और तेजी से काफिले के साथ रवाना हो गए।
प्रतीक्षालय में ही बैठी थीं पत्नी साधना
इस बीच, साधना सिंह गिरनार दर्शन के बाद वापस लौट चुकी थीं और प्रतीक्षालय में ही बैठी थीं। जब काफिला करीब एक किलोमीटर आगे बढ़ गया, तब रास्ते में शिवराज को याद आया कि पत्नी तो साथ में हैं ही नहीं। उन्होंने तुरंत फोन पर संपर्क किया और फिर काफिले के साथ वापस लौटकर पत्नी साधना को साथ लिया और राजकोट के लिए रवाना हो गए।
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बुधनी से पहली बार बने थे विधायक
शिवराज सिंह चौहान ने 1991 से 1992 तक अखिल भारतीय केशरिया वाहिनी का नेतृत्व किया। 31 साल की उम्र में भाजपा ने उन्हें बुधनी विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारा। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 22,000 से अधिक मतों से हराया और विधानसभा पहुंच गए। चौहान को 1991 में भाजपा ने विदिशा संसदीय क्षेत्र से मैदान में उतारा और उन्होंने इसमें भी विजय प्राप्त की। वह सबसे कम उम्र के सांसदों में से एक बन गए और अगले वर्ष यानी 1992 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के महासचिव बन गए।
