शिवराज सिंह चौहान ने किया हैरान...'मामा' का अनूठा संकल्प बढ़ाएगा मान, बोले- स्वागत करने आओ तो फोटो लेकर आओ

MP News: मामा की पदवी से मशहूर केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व CM शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर सुर्खियों में हैं। यहां उन्होंने एक ऐसा संकल्प लिया जो सभी के लिए मिसाल बनने वाला है
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पौधरोपण करते हुए शिवराज सिंह चौहान (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Shivraj Singh Chouhan: मामा की पदवी से मशहूर केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर सुर्खियों में हैं। गुरुवार को वह मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थिति जटाशंकर धाम पहुंचे। यहां उन्होंने जल सखियों के साथ पौधरोपण किया है। इसके साथ ही एक ऐसा संकल्प लिया जो सभी के लिए मिसाल बनने वाला है।

छतरपुर में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज मैंने पौधे लगाने के संकल्प के पांच साल पूरे कर लिए हैं। उन्होंने जोर दिया कि पर्यावरण को बचाने, मिट्टी के कटाव को रोकने, पानी और जीवन को बचाने के लिए पेड़ लगाना बेहद आवश्यक है। पूर्व सीएम ने यह भी बताया कि यह संकल्प अब जन आंदोलन बन रहा है।

शिवराज चौहान ने लिया एक और संकल्प

कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने एक नया संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि लोग फूल माला और स्मृति चिन्ह लेकर मेरा स्वागत करने के लिए आते हैं। कुछ लोग सम्मान करते हैं इसलिए स्वागत करते हैं। कुछ लोग यह सोचते हैं कि मंत्री हैं करना ही पड़ेगा, इसलिए करते हैं। कई बार व्यक्ति को गलतफहमी हो जाती है कि उसका स्वागत हो रहा है, लेकिन वास्तव में वह पद का स्वागत हो रहा होता है।

शिवराज सिंह चौहान ने आगे कहा कि आज से हम तय कर रहे हैं कि फूलमाला और स्मृति चिन्ह की ज़रूरत नहीं है। मैं तो यह कह रहा हूं कि मेरा स्वागत करने आओ तो पेड़ लगाकर फोटो खींचकर आओ और मुझे दिखाकर कहो कि मामा ये पेड़ लगा दिया है। इससे ही मेरा स्वागत हो जाएगा।

5 साल पहले अमरकंटक में लिया था प्रण

केंद्रीय ग्रामीण विकास और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पिछले 5 साल के भीतर 4 हजार 500 से अधिक पौधे रोप चुके हैं। आज से पांच साल पहले 19 फरवरी को उन्होंने पनी पत्नी साधना सिंह चौहान के साथ नर्मदा नदी के तट पर अमरकंटक में पहला पौधा लगाया था। तबसे वह रोजाना कम से कम एक पौधा लगा रहे हैं।

इससे पहले राजधानी दिल्ली के पूसा इलाके में एक कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने एक पेड़ बैंक बनाने का सुझाव देते हुए कहा है कि पर्यावरण बचाने का सबसे सशक्त माध्यम पेड़ लगाना है। हम एक ऐसा पेड़ बैंक बना सकते हैं, जिसमें पीपल, वट, नीम, आम जैसे पेड़ों के पौधे उपलब्ध रहें। जो लोग खुद पौधा लगाना चाहें, वे अपने हाथ से लगाएं। संस्था गड्ढा, पानी और देखभाल की व्यवस्था करेगी।

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