'जिनके पूर्वजों ने संविधान को खारिज किया, उनके वशंज आज कट्टर समर्थक', भागवत व PM मोदी पर बरसे थरूर

कांग्रेस सासंद शशि थरूर ने संविधान को लेकर पीएम मोदी और आरएसएस प्रमुख को आड़े हाथों लिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अच्छा है, जिनके पूर्वज संविधान को खारिज करते रहे। अब उनके वशंज सविंधान के कट्टर समर्थक हैं।
'जिनके पूर्वजों ने संविधान को खारिज किया, उनके वशंज आज कट्टर समर्थक', भागवत व PM मोदी पर बरसे थरूर
शशि थरूर (फोटो-सोशल मीडिया)
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नई दिल्लीः कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि यह बेहद खुशी की बात है कि जिन लोगों ने संविधान को खारिज किया था, उनके वंशज आज इसका उत्सव मना रहे हैं और इसका बचाव कर रहे हैं। थरूर ने शनिवार को अपनी पुस्तक ‘अवर लिविंग कॉन्स्टीट्यूशन' के विमोचन अवसर पर यह टिप्पणी की।

कांग्रेस सांसद ने कहा कि समाज और संविधान दोनों विकसित हो रहे हैं तथा इस प्रक्रिया में हम धीरे-धीरे भारत के सामाजिक ताने-बाने में ‘संवैधानिक मूल्यों और संवैधानिक नैतिकता का समावेश' देख रहे हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा कि ‘‘आज हिंदुत्व आंदोलन से जुड़े लोग संविधान के सबसे कट्टर समर्थकों और उसके रक्षकों में शामिल हैं। प्रधानमंत्री कहते हैं कि यह एकमात्र पवित्र पुस्तक है। आप ऐसी स्थिति देख रहे हैं जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भी संविधान के प्रति समर्थन और निष्ठा की शपथ ली है और इसकी सुरक्षा की बात की है। उन्होंने कहा कि संघ के पुराने नेताओं ने संविधान की 'जड़ से लेकर शाखा' तक को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह गलत भाषा में लिखा गया है और इसमें पश्चिमी विचार समाहित हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने संविधान को लेकर संघ नेताओं के बदले हुए रुख के बारे में कहा, ‘‘ आज उनके बौद्धिक वैचारिक वंशज ही संविधान की शपथ ले रहे हैं और उसका बचाव कर रहे हैं। उनके विचार भी समय के साथ बदले हैं, समाज भी विकसित हो रहा है। फैसले बदल गए हैं, 106 संशोधनों के साथ हमारी व्याख्याएं बदल गई हैं और यही वास्तव में संविधान की ताकत है। उन्होंने कहा मैं यह तर्क दूंगा कि इस प्रक्रिया में आप धीरे-धीरे भारत के सामाजिक ताने-बाने में संवैधानिक मूल्यों और संवैधानिक नैतिकता का समावेश देख रहे हैं।

तिरुवनंतपुरम के सांसद ने तर्क दिया कि हालांकि बहुत सी चीजें “गलत” हो गई हैं और कई चीजें “बदतर” हो सकती हैं, लेकिन एक चीज जो सही हो रही है उनमें से एक यह है कि “संविधान के मूल्य, नैतिकता और आकांक्षाएं आम भारतीयों की चेतना में किस हद तक समा गई हैं”। थरूर ने अपनी पुस्तक में संविधान के विभिन्न भागों का वर्णन किया है, जो इसकी प्रस्तावना से शुरू होता है और फिर इसकी ऐतिहासिक जड़ों की व्याख्या करता है।

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