रूस से भारत आ रहा 'अभेद्य' S-400 मिसाइल सिस्टम, राजस्थान बॉर्डर पर होगी तैनाती! दुश्मन की हर हरकत पर रहेगी नजर

S400 Missile System: भारत को मई के मध्य तक रूस से चौथा S-400 वायु रक्षा तंत्र मिलने वाला है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इसे राजस्थान सेक्टर में तैनात किया जा सकता है।
The 'Impenetrable' S-400 Missile System Arrives in India from Russia; Deployment Planned Along the Rajasthan Border! It Will Keep a Watchful Eye on Every Enemy Move.
s 400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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S400 Missile System Delivery India: अपनी हवाई सुरक्षा को अभेद्य बनाने की दिशा में भारत एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करने के करीब है। रूस से चौथी S-400 वायु रक्षा प्रणाली (Air Defense System) की खेप भारत के लिए रवाना हो चुकी है और उम्मीद है कि मई के मध्य तक यह भारतीय वायुसेना (IAF) के बेड़े में शामिल हो जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अधिकारियों द्वारा प्री-डिस्पैच निरीक्षण के बाद इसे पिछले सप्ताह ही शिप कर दिया गया था। इसकी तैनाती राजस्थान सेक्टर में कि जा सकती है।

S-400 का सफल इतिहास

चौथे S-400 सिस्टम की डिलीवरी ऐसे समय में हो रही है जब देश 'ऑपरेशन सिंदूर' की सालगिरह मनाने जा रहा है। गौरतलब है कि इस अभियान के दौरान S-400 प्रणाली ने अपनी जबरदस्त मारक क्षमता का प्रदर्शन किया था। रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने इस संघर्ष के दौरान 11 लंबी दूरी की S-400 मिसाइलें दागी थीं, जिन्होंने दुश्मन के लड़ाकू विमानों, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम और परिवहन विमानों सहित कई हवाई खतरों को सफलतापूर्वक मार गिराया था।

सीमा पार 400 किमी तक अचूक निशाना

S-400 सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत इसकी रेंज है। यह 400 किलोमीटर की दूरी तक किसी भी हवाई खतरे को पहचान कर उसे नष्ट कर सकता है। राजस्थान में तैनात होने के बाद, यह पाकिस्तान में सिंधु नदी के पूर्वी इलाकों तक के हवाई क्षेत्र पर नजर रखने और उन्हें निशाना बनाने में सक्षम होगा। इसके साथ ही, भारत अपनी इन्वेंट्री को मजबूत करने के लिए 280 कम और लंबी दूरी की मिसाइलों की खरीद की योजना भी बना रहा है ताकि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल किए गए स्टॉक की भरपाई की जा सके।

रक्षा क्षेत्र में भविष्य की योजनाएं

भारत केवल मौजूदा प्रणालियों तक सीमित नहीं है। सरकार ने पांच और S-400 सिस्टम के अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है और पांचवीं प्रणाली इसी साल नवंबर तक मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, भारत रूस से कम से कम 12 पैंटसिर (Pantsir) वायु रक्षा प्रणाली खरीदने की तैयारी में है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए, 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत अतिरिक्त 40 प्रणालियों का घरेलू स्तर पर उत्पादन किया जा सकता है। साथ ही, निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ एक रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (MRO) सुविधा स्थापित करने पर भी विचार किया जा रहा है।

रक्षा खरीद में ऐतिहासिक निवेश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने हाल ही में लगभग 2.38 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी है। वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 6.73 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड प्रस्तावों को हरी झंडी मिली है।

इन स्वीकृतियों में वायुसेना के लिए S-400 के साथ-साथ मध्यम परिवहन विमान (जो पुराने AN-32 और IL-76 की जगह लेंगे) और रिमोटली पायलेटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट शामिल हैं। सेना के लिए धनुष गन सिस्टम और हवाई निगरानी प्रणालियों को भी मंजूरी दी गई है, जो भारत की युद्धक क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।

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