इधर सरकार-विपक्ष वक्फ बिल में उलझे उधर RSS ने कर दिया बड़ा ऐलान, दोहराया जाएगा 1992 वाला इतिहास?

RSS के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले से एक कन्नड पत्रिका से बातचीत के दौरान पूछा गया कि संघ के काम से प्रेरित होकर बहुत से लोग मस्जिदों और खंडहरों के नीचे मंदिर खोज रहे हैं, क्या संघ ऐसे प्रयासों का समर्थन करता है?
इधर सरकार-विपक्ष वक्फ बिल में उलझे उधर RSS ने कर दिया बड़ा ऐलान, दोहराया जाएगा 1992 वाला इतिहास?
इधर सरकार-विपक्ष वक्फ बिल में उलझे उधर RSS ने कर दिया बड़ा ऐलान, दोहराया जाएगा 1992 वाला इतिहास?
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नवभारत डेस्क: अयोध्या हमारी अब काशी-मथुरा की बारी… ऐसे नारे आरएसएस (RSS) के कार्यकर्ता फिर से पूरे देश में लगाते हुए दिखने वाले हैं। जी हां, सही सुना आपने मथुरा-काशी मंदिर मामले पर आरएसएस (RSS) का बडा बयान सामने आया है। संघ की तरफ से मथुरा-काशी मंदिर मामले में अपने सदस्यों को आंदोलन करने की छूट दे दी गई है। RSS के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले (Dattatreya Hosabale) ने एक कन्नड पत्रिका से बातचीत के दौरान कहा कि काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी विवाद तथा मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूिम मंदिर विवाद मामले में कार्यकर्ता चाहें तो वो आंदोलन शुरू कर सकते हैं। हम उनको नहीं रोक रहें हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने साफ किया है कि अगर संगठन के सदस्य मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि तथा काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी विवाद से संबंधित प्रयासों में भाग लेते हैं तो संगठन को इससे कोई आपत्ति नहीं होगी। ऐसे में अब चर्चा हो रही है कि अयोध्या में 1992 में जैसे कारसेवा हुई थी, कहीं फिर से वैसा ही काम ना हो जाए।

हर जगह मंदिर खोजने पर क्या बोले?

दरअसल RSS के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले से कन्नड पत्रिका से बातचीत में पूछा गया कि संघ के काम से प्रेरित होकर बहुत से लोग मस्जिदों तथा खंडहरों के नीचे मंदिर खोज रहे हैं और इन मामलों को वैसे ही सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं जिस तरह राम जन्मभूमि मामले को सुलझाया गया था। क्या संघ ऐसे प्रयासों का समर्थन करता है? इसके जवाब में दत्तात्रेय होसबोले ने बताया कि इसे पिछले 50 वर्षों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। राम जन्मभूमि आंदोलन संघ ने शुरू नहीं किया था। उन्होंने कहा कि कई साधु-संतों और मठाधीशों ने बैठक की, चर्चा की तथा राम जन्मभूमि को पुनः प्राप्त करने का निर्णय लिया। उन्होंने संघ से समर्थन मांगा तथा हम इस बात पर सहमत हुए कि सांस्कृतिक दृष्टिकोण से, राम जन्मभूमि को फिर से प्राप्त करना और मंदिर बनाना आवश्यक था। उस वक्त, विश्व हिंदू परिषद और धर्म गुरुओं ने तीन मंदिरों के बारे में बात की थी। अगर संघ के कुछ स्वयंसेवक इन तीन मंदिरों से संबंधित प्रयासों में शामिल हैं, तो संघ उन्हें रोक नहीं रहा है।

धर्मांतरण, गोहत्या, लव जिहाद जैसी कई अन्य समस्याएं

साथ ही उन्होंने सभी मस्जिदों को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर किए जाने वाले प्रयासों के खिलाफ चेतावनी दी और सामाजिक कलह से बचने की आवश्यकता पर बल दिया। होसबोले ने आगे कहा कि अगर हम बाकी सभी मस्जिदों तथा संरचनाओं के बारे में बात करते हैं, तो क्या हमें 30,000 मस्जिदों को खोदना शुरू कर देना चाहिए और इतिहास को पलटने का प्रयास करना चाहिए? क्या इससे समाज में और अधिक शत्रुता तथा आक्रोश पैदा नहीं होगा? क्या हमें एक समाज के रूप में आगे बढ़ना चाहिए या फिर अतीत में ही अटके रहना चाहिए?

हम इतिहास में कितनी दूर चले गए हैं? अगर हम ऐसा करते रहेंगे, तो हम अन्य महत्वपूर्ण सामाजिक परिवर्तनों पर कब ध्यान केंद्रित करेंगे? उन्होंने आगे कहा कि आज समाज के सामने धर्मांतरण, गोहत्या, लव जिहाद जैसी कई अन्य समस्याएं हैं। संघ ने कभी नहीं कहा कि इन मुद्दों को नजरअंदाज किया जाए या फिर इन पर काम न किया जाए।

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