यूपी में भाजपा को आंख दिखा पाएंगे महाराष्ट्र के आठवले? विधानसभा चुनाव में RPI ने की 25 सीटों की मांग

Ramdas Athawale UP Election: यूपी विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए में हलचल। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले की पार्टी RPI ने बीजेपी से मांगी 25 सीटें, सम्मानजनक सीटें न मिलने पर क्या करेंगे आठवले?
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रामदास आठवले (सोर्स: सोशल मीडिया)
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RPI Demands 25 Seats: महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले अब उत्तर प्रदेश के सियासी अखाड़े में अपनी ताकत आजमाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर आठवले ने बड़ा दांव खेलते हुए एनडीए गठबंधन के भीतर अपनी पार्टी, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया, के लिए 25 सीटों की मांग कर दी है।

तैयारी 25 की, उम्मीद सम्मानजनक सीटों की

आठवले का कहना है कि उनकी पार्टी राज्य की लगभग 20 से 25 सीटों पर जोर-शोर से तैयारी कर रही है। हालांकि, मीडिया बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी संकेत दिया कि गठबंधन के भीतर कम से कम 5 से 6 सीटें तो आरपीआई को मिलनी ही चाहिए। अब सवाल यह उठता है कि क्या उत्तर प्रदेश में बीजेपी आठवले की मांग स्वीकार करेगी या फिर आठवले को भी उसी तरह का समझौता करना पड़ेगा जैसा महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे और अजित पवार गुट के साथ देखा जा रहा है।

योगी के काम की तारीफ, पर अपनी शर्तों पर अडिग

रामदास आठवले ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कामकाज की जमकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि योगी जी ने राज्य में गुंडाराज को खत्म किया है और पीएम मोदी के नेतृत्व में विकास की रफ्तार तेज हुई है। उन्हें पूरा भरोसा है कि एनडीए गठबंधन 403 में से 300 से अधिक सीटें जीतेगा। अब सीएम योगी आदित्यनाथ की तारीफ के पीछे भी रामदास आठवले की 25 सीटों पर चुनाव लड़ने की ईच्छा हो सकती हैं।

क्या यूपी में आंख दिखा पाएंगे आठवले?

महाराष्ट्र के इस नेता के लिए यूपी की राह आसान नहीं है। हालांकि आठवले ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है कि वे गठबंधन को मजबूत रखना चाहते हैं, लेकिन सीटों के बंटवारे पर उनकी चेतावनी ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। रामदास आठवले ने पहले ही अपने बयान में संकेत दे दिए थे कि यदि उन्हें सम्मानजनक सीटें नहीं मिलीं, तो वे स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

अब देखना यह होगा कि क्या बीजेपी नेतृत्व रामदास आठवले की इस मांग को गंभीरता से लेता है या फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में आरपीआई को अपनी जगह बनाने के लिए अकेले ही संघर्ष करना होगा। यह मुकाबला केवल सीटों का नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में एक महाराष्ट्रीयन नेता की साख का भी है।

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