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Indian Railway का कारनामा 20 दिन के काम लगा दिए 3 साल, CAG की रिपोर्ट ने खोली वैष्णव के विभाग की पोल

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने कहा है कि पूर्वी तट रेलवे के मंचेश्वर कैरिज रिपेयर वर्कशॉप ने कोचों की आवधिक मरम्मत के लिए निर्धारित 15-20 दिनों के बजाय तीन साल तक का समय लिया।

  • By Saurabh Pal
Updated On: Apr 04, 2025 | 01:21 PM

अश्विनी वैष्णव (पोटो- सोशल मीडिया)

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नई दिल्लीः नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने कहा है कि पूर्वी तट रेलवे के मंचेश्वर कैरिज रिपेयर वर्कशॉप ने कोचों की आवधिक मरम्मत के लिए निर्धारित 15-20 दिनों के बजाय तीन साल तक का समय लिया। संसद में गुरूवार को पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, कोचों के आवधिक मरम्मत (पीरियोडिक ओव्हरहॉल या पीओएच) के लिए अनुमान यथार्थवादी नहीं थे और हर साल इसमें कमी की जाती थी।

कैग ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट में कहा कि डिपो द्वारा पीओएच के लिए कोच भेजने में देरी के अलावा, कार्यशाला द्वारा कोचों की पीओएच में निर्धारित 15 से 20 दिनों के समय के मुकाबले तीन साल तक का समय लगा। कार्यशाला के संचालन में कई अनियमितताओं का भी कैग ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है।

पूर्वी तट रेलवे (ईसीओआर) के मंचेश्वर कैरिज रिपेयर वर्कशॉप की स्थापना नवंबर 1981 में रेलवे कोचों की मरम्मत के लिए की गई थी। शुरू में कार्यशाला की क्षमता 45 कोच प्रति माह मरम्मत की थी, जिसे 2003-04 में बढ़ाकर 100 कोच कर दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है 2008 से 2016 के दौरान कार्यशाला की क्षमता को बढ़ाकर 150 कोच प्रति माह करने के लिए कार्यशाला का विस्तार किया गया। इसमें कहा गया है कि प्रति माह 150 कोच की मरम्मत क्षमता के मुकाबले, 2016-17 से 2022-23 की अवधि के दौरान कार्यशाला का मरम्मत कार्य 86 से 113 कोच प्रति माह के बीच रहा।

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कैग ने कहा कि ऑडिट का उद्देश्य यह आकलन करना था कि क्या लक्ष्य कार्यशाला में की गई वास्तविक मरम्मत पर आधारित थे और क्या उन्हें समय के भीतर हासिल किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है 191 कोच 10 दिनों से लेकर 171 दिनों तक की अवधि तक यथावत पड़े रहे। अगस्त 2012 में रेलवे बोर्ड ने सभी क्षेत्रीय रेलवे को 100 दिनों के भीतर विफलताओं की निगरानी करने और निवारक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑडिट के दौरान पता चला कि रेलवे बोर्ड को दी गई रिपोर्ट में वर्कशॉप की पीओएच क्षमता को कम करके आंका गया था। इस रिपोर्ट में कई अन्य अनियमितताएं पाई गईं, जैसे कि 4.15 करोड़ रुपये कीमत की चार मशीनें कुछ खामियों के कारण वर्षों से बेकार पड़ी रहीं, सामग्री की खरीद में कमी के कारण स्टॉक की कमी हो गई, तथा अप्रभावी वर्कशॉप सूचना प्रणाली (डब्ल्यूआईएसई) एप्लीकेशन के माध्यम से मरम्मत गतिविधियों की निगरानी की गई।

Railways took three years to complete 20 day work cag report reveals

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Published On: Apr 04, 2025 | 01:20 PM

Topics:  

  • Ashwini Vaishnaw
  • CAG Report
  • Indian Railway

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