

Nandan Nilekani Committee NEET Exam Reforms: सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को नीट 2026 परीक्षा सुधारों पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बताया कि परीक्षा प्रणाली में अगले चरण के सुधारों के लिए इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक हाई-पावर्ड कमेटी बनाई गई है। इसके साथ ही सरकार ने पेपर लीक रोकने और दोषियों के लिए सख्त सजा दिलाने के लिए संसद में एक नया विधेयक पेश किया।
नंदन नीलेकणि कमेटी के गठन के बाद 2024 में डॉ. के. राधाकृष्णन कमेटी की रिपोर्ट एक बार फिर चर्चा में है। डॉ. के. राधाकृष्णन देश के सबसे चर्चित वैज्ञानिक होने साथ बनी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। नीट-यूजी 2024 पेपर लीक विवाद के बाद गठित इस समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए 101 सिफारिशें दी थीं। इस रिपोर्ट का मकसद एनटीए को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और त्रुटिरहित संस्था में बदलना था। आइए आपको बताते हैं कि राधाकृष्णन कमेटी ने सरकार को क्या सिफारिशें की थीं? और सरकार 101 सिफारिशों में से कितनी लागू कर पाई?
राधाकृष्णन कमेटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 23 दिनों तक विस्तृत बैठकें कीं। इसके अलावा MyGov पोर्टल के माध्यम से छात्रों, अभिभावकों और अन्य हितधारकों से 37 हजार से अधिक सुझाव प्राप्त किए गए। रिपोर्ट अक्टूबर 2024 में शिक्षा मंत्रालय को सौंपी गई थी। समिति का मानना था कि परीक्षा प्रणाली में केवल छोटे बदलाव नहीं, बल्कि पूरे ढांचे में व्यापक सुधार की जरूरत है।
शुरुआत में समिति को परीक्षा प्रक्रिया, डेटा सुरक्षा और NTA की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने का जिम्मा दिया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद इसके दायरे को बढ़ाया गया। रिपोर्ट में प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर उसकी छपाई, परिवहन, अभ्यर्थियों की पहचान, परीक्षा केंद्रों के संचालन और शिकायत निवारण तक पूरी परीक्षा प्रक्रिया की कमजोरियों का विश्लेषण किया गया।
रिपोर्ट की सबसे अहम सिफारिश कंप्यूटर-असिस्टेड सिक्योर पेन-एंड-पेपर टेस्टिंग (CPPT) मॉडल थी। इसके तहत प्रश्नपत्रों की छपाई और देशभर में भौतिक रूप से भेजने की व्यवस्था खत्म करने का सुझाव दिया गया। इसके बजाय एन्क्रिप्टेड प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्रों के सुरक्षित सर्वर पर भेजे जाएंगे और परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले वहीं प्रिंट किए जाएंगे। इससे परिवहन के दौरान पेपर लीक की संभावना काफी कम हो सकती है।
इसके साथ ही समिति ने DIGI-EXAM नाम का डिजिटल सत्यापन सिस्टम विकसित करने का सुझाव भी दिया। यह व्यवस्था Digi Yatra की तर्ज पर काम करेगी। इसमें आधार, बायोमेट्रिक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से आवेदन, परीक्षा और प्रवेश के अलग-अलग चरणों में अभ्यर्थियों की पहचान की जाएगी। इसका उद्देश्य फर्जी उम्मीदवारों और पहचान से जुड़ी गड़बड़ियों को रोकना है।
रिपोर्ट में कहा गया कि केवल नई तकनीक अपनाने से समस्याएं खत्म नहीं होंगी। समिति ने NTA की संस्थागत क्षमता बढ़ाने और निजी एजेंसियों पर निर्भरता कम करने की सिफारिश की। इसके तहत एजेंसी की शीर्ष प्रशासनिक संरचना को मजबूत बनाने, डायरेक्टर जनरल के नेतृत्व में नई व्यवस्था लागू करने और सूचना सुरक्षा, अनुसंधान, फोरेंसिक तथा विजिलेंस जैसे 10 विशेष विभाग बनाने का सुझाव दिया गया।
रिपोर्ट में सरकारी संस्थानों में चरणबद्ध तरीके से कम से कम 1,000 सुरक्षित परीक्षा केंद्र विकसित करने की सिफारिश की गई। इन केंद्रों पर बिजली, तकनीकी सहायता, वेंटिलेशन, हेल्प डेस्क और अभ्यर्थियों के सामान रखने के लिए लॉकर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई। दूर-दराज के क्षेत्रों के लिए मोबाइल परीक्षा केंद्र बसों का भी सुझाव दिया गया, जिनमें करीब 150 उम्मीदवार परीक्षा दे सकेंगे।
समिति ने बड़ी परीक्षाओं को कई दिनों या कई सत्रों में आयोजित करने का सुझाव दिया है। रिपोर्ट में NEET-UG के लिए भी भविष्य में मल्टी-सेशन परीक्षा को एक संभावित विकल्प बताया गया है। जहां कई सत्रों में परीक्षा होगी, वहां स्कोर नॉर्मलाइजेशन पूरी तरह पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से करने की सिफारिश की गई है। लंबे समय में कंप्यूटर एडैप्टिव टेस्टिंग अपनाने का भी सुझाव दिया गया।
कमेटी ने परीक्षा सुधारों के साथ छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को भी महत्वपूर्ण माना। रिपोर्ट में NTA के भीतर अलग मानसिक स्वास्थ्य सेल, टेली-हेल्पलाइन, काउंसलिंग सेवाएं और शिक्षकों के लिए संवेदनशीलता कार्यक्रम शुरू करने की सिफारिश की गई। साथ ही कोचिंग संस्थानों की निगरानी व्यवस्था पर भी विचार करने का सुझाव दिया गया ताकि छात्रों पर बढ़ते तनाव और परिवारों पर आर्थिक बोझ को कम किया जा सके।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि NTA के शिकायत निवारण तंत्र को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग आधारित चैटबॉट से जोड़ा जाए। इससे छात्र अपनी पसंद की भाषा में परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े सवालों के जवाब और जरूरी जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। समिति का मानना है कि इससे शिकायतों का तेजी से समाधान होगा और पारदर्शिता भी बढ़ेगी। हालांकि सरकार इसमें से अधिकतर सिफारिशों को अभी तक लागू नहीं कर पाई।