

Priyank Kharge RSS Defamation Case: यूथ कांग्रेस नेता मोहम्मद नलपाड और कर्नाटक सरकार में गृह मंत्री प्रियांक खरगे को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पर टिप्पणी मामले में कोर्ट ने समन जारी किया है। 27 जून को बेंगलुरु की कोर्ट ने समन जारी करते हुए दोनों से 21 जुलाई को उनका जवाब मांगा है। आरएसएस के खिलाफ टिप्पणी मामले में प्रियांक खरगे के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट द्वारा समन जारी किया गया है।
मामले की सुनवाई करते हुए एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट संदीप पाटिल ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 के तहत माना कि प्रियांक खरगे और नलपाड के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला बनता है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि बीएनएस की धारा 356 के तहत प्रियांक खरगे और मोहम्मद नलपाड के खिलाफ दंडनीय अपराध का संज्ञान लिया गया है। कोर्ट ने कार्यालय को निर्देश दिया कि इस मामले को आपराधिक मामले के तहत दर्ज करें और दोनों आरोपियों को समन जारी करे। कोर्ट ने इसका जवाब 21 जुलाई, 2026 तक देने का निर्देश दिया है।
प्रियांक खरगे ने आरएसएस पर आरोप लगाते हुए कहा कि संगठन ने महात्मा गांधी को भी निशाना बनाया था। संघ पर तंज कसते हुए खहगे ने बताया कि जो लोग भी देश के संविधान में विश्वास रखता है, धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों का पालन करता है, तिरंगे का सम्मान करता है, वे उसे निशाना बनाते हैं। उन्होंने बताया कि संघ ने हमेशा उन लोगों को भी निशाने पर लिया जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई की, उनके खिलाफ खड़े थे, जबकि वे खुद ही अंग्रेजों के साथ थे।
आरएसएस की कानूनी स्थिति पर हमला बोलते हुए प्रियांक खरगे ने इसे एक अपंजीकृत संगठन बताया था। संगठन पर सवाल उठाते हुए खरगे ने पूछा था कि क्या यह संगठन देश के कानून और संविधान से भी ऊपर है? प्रियांक खरगे ने तर्क दिया कि यदि देश के अन्य संस्थाएं पंजीकृत होकर नियमों का पालन करती हैं तो आरएसएस को छूट का क्यों मिल रहा है। उन्होंने मांग की थी कि देश का संविधान और कानून सभी संगठनों पर समान रूप से लागू होना चाहिए और आरएसएस को भी इसके दायरे में लाकर उसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।