पीएम मोदी और अखिलेश यादव (सोर्स- सोशल मीडिया)
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि प्रयागराज महाकुंभ से अनेक अमृत निकले हैं। इससे एकता का अमृत निकला है। देश के हर क्षेत्र और हर कोने से लोग इस आयोजन में आए और एक हो गए। लोग अहंकार से हम में एकजुट हो गए। प्रधानमंत्री मोदी ने आज लोकसभा में अपने भाषण में कहा कि महाकुंभ विरासत से जुड़ने की राजधानी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाकुंभ को जनता का, जनता से प्रेरित और जनता का आयोजन बताया। लोकसभा में प्रधानमंत्री ने महाकुंभ पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महाकुंभ में हमने राष्ट्रीय चेतना का विशाल रूप देखा। इस दौरान उन्होंने विपक्ष को भी निशाने पर लिया।
महाकुंभ की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए पीएम ने महाकुंभ के बारे में नकारात्मक बातें करने वाले तत्वों पर भी जोरदार हमला बोला। मोदी ने कहा कि महाकुंभ के सफल आयोजन ने उन शंकाओं को भी करारा जवाब दिया है जो कुछ लोगों के मन में हमारी क्षमताओं को लेकर थीं। बता दें कि सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी लगातार महाकुंभ पर सवाल उठाए थे।
प्रधानमंत्री ने महाकुंभ की तुलना भारतीय इतिहास के मील के पत्थरों से की। उन्होंने कहा कि हर राष्ट्र के जीवन में ऐसे क्षण आते हैं जो सदियों और आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल बन जाते हैं। मैं प्रयागराज महाकुंभ को एक ऐसे मील के पत्थर के रूप में देखता हूं जिसमें देश के जागरूक होने का प्रतिबिंब दिखता है।
पीएम मोदी ने कहा कि सफल महाकुंभ, महाकुंभ पर सवाल उठाने वालों को जवाब है। उन्होंने कहा कि महाकुंभ में बड़े और छोटे का कोई भेद नहीं था। पीएम मोदी ने कहा कि विघटन के दौर में हमारी एकता एक महत्वपूर्ण बिंदु है। उन्होंने कहा कि युवा परंपरा और संस्कृति को अपना रहे हैं।
लोकसभा में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘पिछले साल अयोध्या के राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में हम सभी ने महसूस किया कि देश अगले एक हजार साल के लिए कैसे तैयार हो रहा है। इसके एक साल बाद महाकुंभ के इस आयोजन ने हम सभी की इस सोच को और मजबूत किया है। देश की ये सामूहिक चेतना देश की ताकत को दिखाती है। किसी भी राष्ट्र के जीवन में, मानव जीवन के इतिहास में ऐसे कई मोड़ आते हैं, जो सदियों के लिए और आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल बन जाते हैं।
देश की ख़बरों के लिए यहां क्लिक करें
हमारे देश के इतिहास में ऐसे क्षण आए हैं, जिन्होंने देश को नई दिशा दी, देश को झकझोरा और जगाया। उदाहरण के लिए, भक्ति आंदोलन के दौरान हमने देखा कि देश के हर कोने में आध्यात्मिक चेतना उभरी। एक सदी पहले शिकागो में स्वामी विवेकानंद द्वारा दिया गया भाषण भारत की आध्यात्मिक चेतना का उद्घोष था। इसने भारतीयों के स्वाभिमान को जगाया।