जयललिता को पीएम मोदी की श्रद्धांजलि: पोंगल लंच से शपथ ग्रहण तक, साझा किए अनसुने किस्से
Jayalalithaa Birth Anniversary: पीएम मोदी ने 'मन की बात' में पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता को 'दूरदर्शी' नेता बताते हुए याद किया। उन्होंने सुशासन और अम्मा के साथ अपने पुराने रिश्तों पर भावुक चर्चा की।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
जयललिता के साथ पीएम मोदी, फोटो- सोशल मीडिया
Tamil Nadu Politics 2026: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के जरिए दक्षिण भारत की राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। 24 फरवरी को पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की जयंती से पहले उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए पीएम ने अम्मा के साथ बिताए पलों और उनके सुशासन के मॉडल को याद किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में जयललिता जी को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें समाज के कल्याण के लिए समर्पित एक दूरदर्शी और सुलझी हुई नेता बताया। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे देश में वे लोग हमेशा जनता के दिलों में जीवित रहते हैं, जिन्होंने अपने नेक कार्यों में जनता को हमेशा प्राथमिकता दी है। उन्होंने रेखांकित किया कि ‘अम्मा’ जयललिता जी एक ऐसी ही लोकप्रिय लीडर थीं, जिनका जिक्र होते ही तमिलनाडु के लोगों के चेहरे आज भी खिल उठते हैं,। उन्होंने उनके प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें एक ऐसी जनप्रिय नेता माना, जिनका प्रभाव आज भी राज्य की राजनीति और समाज पर बना हुआ है।
नारी शक्ति के उत्थान में सराहनीय प्रयास किया: पीएम मोदी
पीएम मोदी ने विशेष रूप से जयललिता जी के महिला सशक्तिकरण के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि हमारी नारी शक्ति का जुड़ाव उनसे और भी विशेष रहा है, क्योंकि सरकार में रहते हुए उन्होंने माताओं, बहनों और बेटियों के लिए कई सराहनीय और ठोस प्रयास किए। अम्मा की दूरदर्शिता का ही परिणाम था कि उन्होंने तमिलनाडु में ऐसी योजनाएं लागू कीं, जिनसे महिलाओं के जीवन स्तर में सकारात्मक सुधार आया। इसी समर्पण के कारण तमिलनाडु की महिलाएं उन्हें आज भी अपना मसीहा मानती हैं।
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गुजरात के शपथ ग्रहण समारोह का जिक्र
अपने निजी अनुभवों को साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि अम्मा जयललिता के साथ हुई हर मुलाकात और बातचीत उनके मन में आज भी ताजा है। उन्होंने एक अनसुना किस्सा साझा करते हुए बताया कि जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब जयललिता उनके 2002 और 2012 के शपथ ग्रहण समारोहों में शामिल होने के लिए विशेष रूप से गुजरात आई थीं। पीएम ने बताया कि जब वे दोनों अपने-अपने राज्यों के मुख्यमंत्री थे, तब उनके बीच अक्सर ‘गुड गवर्नेंस’ (सुशासन) जैसे गंभीर विषयों पर विस्तृत चर्चा होती रहती थी। उन्होंने अम्मा को एक ऐसी नेता बताया जिसकी सोच बिल्कुल साफ थी और विचार बेहद सुलझे हुए थे।
पोंगल का वो लंच हमेशा याद रहेगा: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने कई वर्ष पहले की एक याद साझा करते हुए बताया कि जयललिता जी ने उन्हें पोंगल के पावन अवसर पर चेन्नई में लंच के लिए आमंत्रित किया था। उन्होंने उस पल को याद करते हुए कहा कि अम्मा का स्नेह से भरा वो भाव उनके लिए हमेशा अविस्मरणीय रहेगा। पीएम ने जयललिता जी की विरासत की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सोच की स्पष्टता उनकी सबसे बड़ी खूबियों में से एक थी।
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राजनीतिक मायने: दक्षिण की भावनाओं से जुड़ने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी का यह संबोधन महज एक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि तमिलनाडु के करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ने की एक गहरी राजनीतिक कोशिश भी है। जयललिता की जयंती से ठीक पहले उनकी प्रशंसा करना राज्य के चुनावी माहौल में एक नई चर्चा छेड़ सकता है।
एक नजर जयललिता के सियासी सफर की ओर
जे. जयललिता का जन्म 24 फरवरी 1948 को कर्नाटक के मेलकोट में हुआ था। आज वे जीवित होतीं तो 78 वर्ष की होतीं, लेकिन दिसंबर 2016 में चेन्नई में 67 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। उनके अंतिम संस्कार में भारी जनसमूह उमड़ा था। जयललिता जयराम के नाम से जन्मी इस नेता को समर्थक स्नेह से ‘अम्मा’ और ‘थलाइवी’ कहकर पुकारते थे।
फिल्मी दुनिया में सफल करियर के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और अपनी मजबूत पकड़ बनाई। 1989 में वे अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) की प्रमुख बनीं। इसके बाद 1991 में पहली बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं। कुल मिलाकर वे छह बार- 1991, 2001, 2002, 2011, 2015 और 2016 राज्य की कमान संभालने में सफल रहीं और लंबे समय तक प्रदेश की राजनीति में प्रभावशाली रहीं।
